बरेली। खाद, बीज वितरण को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाले कृषि विभाग में अब एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। कृषि रक्षा विभाग के अफसरों और कर्मचारियों पर कीटनाशक वितरण के लिए बनाए जाने वाले लाइसेंस में भी बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगा है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए बनने वाले लाइसेंस की फीस लेकर नगरीय क्षेत्र का लाइसेंस बनाया जा रहा है। इससे सरकार को लाखों की चपत लग रही है। मामला संज्ञान में आने पर डीएम ने संयुक्त जांच टीम गठित कर 10 दिन में साक्ष्यों सहित रिपोर्ट मांगी है। जांच की भनक लगते ही विभाग में खलबली मच गई है। बताया जाता है कि गुपचुप तरीके से कर्मचारी दस्तावेजों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं।
बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर के जिला कृषि रक्षा अधिकारी और उनके मातहत बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी कर राजकीय कोष में जमा होने वाली राशि को खुद डकार रहे हैं। आरोप है कि साल 2015 के शासनादेश के तहत नगरीय क्षेत्र के लिए जारी होने वाले कीटनाशक बिक्री के लाइसेंस को ग्रामीण क्षेत्र में दर्शाकर लाखों रुपये हजम कर रहे हैं। साढ़े सात हजार रुपये में जारी होने वाले लाइसेंस को ग्रामीण क्षेत्र की डेढ़ हजार रुपये फीस लेकर जारी किया जा रहा है। बाकी छह हजार रुपये आपस में बांट लिए जाते हैं। यह सिलसिला साल 2015 में शासनादेश जारी होने के बाद से ही चल रहा है। मामले की शिकायत इज्जतनगर शेरपुर के जनआदर्श कॉलोनी निवासी अमरेंद्र सिंह ने डीएम से की है। उन्होंने शिकायत के साथ कई साक्ष्य भी सौंपे हैं। डीएम ने जिला संख्याधिकारी और सहायक लेखाअधिकारी (विकास विभाग) को 10 दिन में जांच कर साक्ष्यों समेत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में जानकारी के लिए जिला कृषि अधिकारी को कॉल की गई लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई।
10-15 हजार रुपये हर लाइसेंस पर वसूली
एक पत्र के जरिए डीएम से हुई शिकायत में अफसरों द्वारा खाद और बीज का लाइसेंस जारी करने में भी खेल के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि मंडल के सभी जिला कृषि रक्षाधिकारी प्रत्येक लाइसेंस बनाने में दस से लेकर पंद्रह हजार रुपये तक की वसूली कर रहे हैं। लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद भी शहर को गांव में दर्शाकर यह खेल हो रहा है। कहा है कि अगर कोषागार में जमा किए गए चालान से लाइसेंस की पत्रावलियां निकालकर विक्रेता के पते का मिलान किया जाय तो यह खेल का खुलासा हो जाएगा। बताया है कि खेल के लिए अफसरों ने कई बिचौलिये लगा रखे हैं, जो उन्हें वसूली की रकम पहुंचाते हैं।
तीन घंटे तक दुधमुंही बच्ची के इलाज के लिए अस्पताल में भटकती रही मां
बरेली। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में तैनात छह बाल रोग में से चार छुट्टी पर हैं। इस वजह से बच्चों को दवा दिलाने के लिए उनके परिजन अस्पताल में इधर से उधर दौड़ लगा रहे हैं। बुधवार को भी ऐसा हुआ। एक मां छह माह की बच्ची को लेकर बच्चा वार्ड से महिला अस्पताल तक चक्कर काटती रही। बच्ची लगातार रो रही थी लेकिन डॉक्टर बोले कि महिला अस्पताल में मरीजों को देखने के बाद ही देखेंगे। तीन घंटे बाद इलाज मिला तो बच्ची ने दूध पीया।
बुधवार को दौली निवासी अजमेरी छह माह की बेटी अल्तिशा को लेकर बच्चा वार्ड पहुंचीं। पेट फू लने के कारण बच्ची तीन घंटे से रो रही थी। वार्ड इंचार्ज डेजीलाल ने महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ को फोन कर बच्ची की हालत बताई। कहा, कुछ अन्य बच्चे भी बीमार हैं लेकिन डॉक्टर ने साफ कह दिया कि महिला अस्पताल की ओपीडी खत्म होने के बाद ही देखेंगे। अजमेरी खुद बच्ची को लेकर महिला अस्पताल पहुंचीं लेकिन डॉक्टर ने लौटा दिया। तीन घंटे तक बच्ची रोती-बिलखती रही। इसके बाद जब डॉक्टर ने बच्ची को देखा तो उसकी हालत में सुधार हुआ।
नहीं मिला इलाज तो निजी अस्पताल ले गए दंपती
डेलापीर निवासी सुरेश और नीता अपने एक साल के बेटे वंश को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उसे निमोनिया और डायरिया हुआ था। करीब दो घंटे तक चक्कर काटने के बाद भी जब उन्हें इलाज नहीं मिला तो वह उसे रामपुर गार्डन के निजी अस्पताल ले गए।
गैस्पिंग हालत में पहुंचा बच्ची, नहीं मिला इलाज
बुधवार को भुता के अनुज एक वर्षीय बेटी रिया शर्मा को लेकर जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में पहुंचे। बच्ची सूजन, खांसी, कफ, निमोनिया और डायरिया से पीड़ित थी। मगर बाल रोग विशेषज्ञ न होने के कारण उसे इलाज नहीं मिला। वार्ड इंचार्ज डेजीलाल ने बताया कि बच्ची गैस्ंिपग (अंतिम समय में) की हालत में आई है और काफी गंभीर।
एक डॉक्टर बीमारी के चलते छुट्टी पर हैं और दूसरे डॉक्टर ने छुट्टी ली हुई है। महिला अस्पताल में चार डॉक्टर हैं, वहां दिखाने को कहा गया है।
- डॉ. टीएस आर्या, सीएमएस, जिला अस्पताल।
एक डॉक्टर के पिता की हालत बेहद गंभीर है और एक के यहां कंडोलेंस हुआ है। इस कारण छुट्टी पर हैं। महिला अस्पताल की ओपीडी और एसएनसीयू वार्ड को दो डॉक्टर देख रहे हैं। कॉल पर बच्चा वार्ड और जिला अस्पताल भी जाते हैं।
-डॉ. अलका शर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ।
जरूरी दवाएं डिमांड पर नहीं मिलतीं इन्हेलर, लैबीटाल बेवजह भेज दीं
बरेली। स्वास्थ्य विभाग में जरूरी दवाएं डिमांड के बावजूद भी नहीं भेजी जा रही हैं। वहीं, जिन दवाओं की डिमांड की गई है उनकी सप्लाई बेवजह ही की जा रही है। अब स्वास्थ्य विभाग ने बिना डिमांड भेजी गई इन्हेलर और लैबीटाल को वापस भेजा है।
इस बार यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन ने दो हजार विक्स इन्हेलर और दो हजार डिलीवरी के समय प्रयोग होने वाली लैबीटाल टैबलेट भेज दी। जबकि इनकी डिमांड ही नहीं की गई थी। ऐसे ही इन्हें भी वापस कर दिया गया है। बता दें कि करीब पंद्रह दिन 48 तरह की एक करोड़ टेबलेट की डिमांड यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से की गई थी लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। इसके अलावा सर्दी, जुकाम, खांसी की सिरप, एआरवी समेत अन्य जरूरी दवाआें का भी टोटा है। इसके अलावा बिना डिमांड भेजी गई एस्माएुल एट्रोन, पांच हजार एमाक्सीसिलीन इंजेक्शन, गर्भपात की 12 हजार मीजी प्रिस्टाल टेबलेट भी वापस भेजी गई हैं।