एंटीकरप्शन टीम की गिरफ्त में आए विकास भवन के बाबू ने दबा रखी थी तमाम फाइलें
बरेली। एंटी करप्शन टीम द्वारा तीन माह पहले रिश्वत लेते पकड़े गए जिला पंचायती राज विभाग के बाबू की ओर से दबाई गईं ग्राम प्रधानों की आरोपों की फाइलों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित पटल पर नई तैनाती होने के बाद डीपीआरओ ने ग्राम प्रधानों की फाइल निकालने और उनकी कुंडली तैयार करने को कहा है। निर्देश जारी होते ही अलमारी में धूल फांक रही फाइलें बाहर निकालकर ग्राम प्रधानों की सूची तैयार क रने की कवायद शुरू होने से विभाग समेत ग्राम प्रधानों में खलबली मची हुई है।
तीन माह पहले अक्तूबर में ग्राम प्रधानों के भ्रष्टाचार के आरोपों की फाइलें दबाकर रिश्वत मांगने वाले बाबू प्रेमपाल को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथों दबोचा था। इसी दौरान डीपीआरओ पर भी गाज गिरी और उनका तबादला हो गया। नवागत डीपीआरओ भी बीमारी की वजह से ज्यादातर अवकाश पर ही रहे। इसलिए बाबू प्रेमपाल के पास पहुंची करीब सवा सौ प्रधानों के खिलाफ शिकायतों पर जांच शुरू नहीं हो सकी। पिछले दिनों डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद को भी मुख्यालय से अटैच कर दिया गया। ऐसे में रिक्त पद पर एडीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार को डीपीआरओ पदभार सौंपा गया। डीपीआरओ ने पिछले करीब साल भर से ग्राम प्रधानों की लंबित फाइलों को बाहर निकालकर जांच शुरू कराने की कार्रवाई शुरू की है। बताया जाता है कि प्रेमपाल ने जिन प्रधानों से रिश्वत ली है उनकी जांच प्राथमिकता से की जाएगी। इसके लिए पटल बाबू को ग्राम प्रधानों की शिकायतों के अनुसार सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘रिश्वत लेते पकड़े गए बाबू की रिक्त पटल पर नई तैनाती होने के बाद ग्राम प्रधानों से संबंधित लंबित मामलों की जांच कराई जाएगी। फिलहाल सूची तैयार कराई जा रही है।’
- धर्मेंद्र कुमार, डीपीआरओ