बरेली। बच्चों से प्रताड़ित और गाढ़ी कमाई से बनाए अपने ही घर से बेदखल बूढ़े मां-बाप की अब ‘घर वापसी’ होगी। समाज कल्याण निदेशक ने पत्र जारी कर वृद्धाश्रम वाले जिलों में सुलह अधिकारी की नियुक्ति करने के निर्देश दिए हैं। इन सुलह अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के बीच विवाद को खत्म कराकर उन्हें घर वापस भिजवाएं। समाज कल्याण विभाग पहुंचे पत्र पर कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
समाज कल्याण विभाग के निदेशक बालकृष्ण त्रिपाठी ने सभी जिलाधिकारियों को जारी पत्र में उत्तर प्रदेश माता पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण व कल्याण नियमावली का हवाला देते हुए कहा है कि प्रत्येक तहसील में सुलह अधिकारी नियुक्त किए जाएं। इसके अलावा जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सभी जिलों में जिला स्तरीय अपीलीय अधिकरण और तहसीलों में एसडीएम की अध्यक्षता में भरण-पोषण अधिकरण का गठन करें। अधिकरण में पंजीकृत वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित विवादों का समाधान, निस्तारित प्रकरणों की सूचना हर माह निर्धारित प्रारूप में जिला समाज कल्याण अधिकारी को भेजें। सुलह अधिकारी पंजिका बनाकर तहसील क्षेत्र के सभी स्वैच्छिक संस्थाओं (वृद्धाश्रम) का विवरण दर्ज किया जाए। जो संस्था वृद्धों के लिए काम कर रही है, उस संस्था संचालक का विवरण भी दर्ज करें। वरिष्ठ नागरिकों को जीवन और संपत्ति सुरक्षा मामलों में भी सुलह अधिकारी की भूमिका होगी। साथ ही, पुलिस विभाग के ‘ऑपरेशन सवेरा’ कार्यक्रम के जरिए पुलिस थानों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए गठित सेल से सुलह अधिकारी संपर्क कर सहयोग देंगे।
जनप्रतिनिधि का भी लेना होगा सहयोग
समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित ने बताया कि सुलह अधिकारी तहसील के सभी निर्वाचित सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य आदि का भी ब्योरा रखेंगे। ताकि पीड़ित बुजुर्गों की जानकारी मिल सके। निदेशक ने कहा है कि सुलह अधिकारी संबंधित तहसील में चल रहे वृद्धाश्रमों में हर माह दो बार निरीक्षण करेंगे। जनपद स्तर पर होने वाले तहसील, थाना दिवस में उपस्थित रहकर वरिष्ठ नागरिकों की अर्जियों, शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराने में सहयोग करेंगे।