बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर स्थित समाज कल्याण विभाग के हास्टल में अवैध कब्जे हटाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। डीएम से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। प्रशासन का सहयोग मिलते ही हास्टल को कब्जा मुक्त करा दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन हॉस्टल में बाहरी लोग भी रहते हैं। जिससे परिसर का माहौल खराब हो रहा है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में समाज कल्याण विभाग के कुल तीन हास्टल हैं। इनमें एक महिला हास्टल भी है। महिला हास्टल पहले से ही विश्वविद्यालय को सौंपा जा चुका है और अब इसका संचालन विवि ही करता है। दो अन्य हास्टल अभी भी समाज कल्याण विभाग संचालित कर रहा है। विवि की जांच में पता चला कि इन हास्टलों में 20-20 सालों से लोग रह रहे हैं। ये छात्र नहीं हैं और ना ही हास्टल में इनका कहीं कोई नाम ही दर्ज है। इसे लेकर पिछले परिवहन मंत्री स्वतंत्र प्रभार अशोक कटारिया से भी चर्चा की गई। इधर, विवि प्रशासन ने डीएम को पत्र लिखने का मन बना लिया है। एक दो सप्ताह के अंदर ही प्रशासन की मदद से इन हॉस्टल को खाली करा लिया जाएगा।
रूटा ने उच्च शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र
बरेली। महात्मा ज्योतिबा फूले विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (रूटा) की ओर से गुरुवार को उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर नियुक्ति संबंध में स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग की गई है। रूटा का कहना है कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद के पूर्व में दिए गए आदेशों के अनुरूप एड हॉक (तदर्थ) सेवा को मौलिक सेवा नहीं माने जाने और 13 नवंबर 2019 को इसके अनुपालन में दोबारा आदेश जारी किया गया। इस निर्णय के विरुद्घ दायर की गई पेटीशन को न्यायालय ने खारिज कर दिया। अधिकांश महाविद्यालय में एडहॉक सेवा को मौलिक सेवा मानते हुए वरिष्ठता में सम्मिलित कर वरिष्ठता सूची बना दी गई। इससे अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कई तरह के विवाद पैदा हो गए। इसे देखते हुए रूटा ने शासन से न्यायालय के आदेशानुसार स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की है।