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कितने किसानों को कितना मुआवजा बांटा... रिकॉर्ड ही गायब

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बरेली। दैवीय आपदा पीड़ित किसानों को बांटे गए मुआवजे के रिकार्ड तहसील से गायब हो गए हैं। एक आरटीआई में मुआवजे की रकम का हिसाब मांगा गया तो ये खुलासा हुआ। पता चला कि वर्ष 2015 में दैवीय आपदा पटल पर जो बाबू तैनात था, उसने स्थानांतरित होने के बाद मुआवजा वितरण संबंधी कोई अभिलेख ही अब तक नहीं सौंपे हैं। इस वजह से तहसील प्रशासन सूचना आयोग को इसकी रिपोर्ट नहीं दे सका है। गर्दन फंसती देख तहसील प्रशासन ने तत्कालीन पटल सहायक से स्पष्टीकरण मांग लिया है।
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सदर तहसील प्रशासन की ओर से वर्ष 2015-16 में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया गया था। इस मामले को लेकर अगस्त 2017 को सूचना के अधिकार के तहत यह रिकार्ड मांगा गया कि ओलावृष्टि में कितने किसानों को मुआवजे की कितनी रकम बांटी गई है। इसमें कई और बिंदु भी शामिल हैं। अपीलकर्ता ने अगस्त 2017 में राज्य सूचना आयोग को इस मामले में सूचनाएं न दिए जाने की जानकारी दी। इसके बाद तहसील के अधिकारियों ने जांच की तो पता चला कि वर्ष 2015 में तैनात रहे दैवीय आपदा पटल प्रभारी (वर्तमान में राजस्व निरीक्षक, रिठौरा) चंद्र प्रकाश शर्मा ने अब तक मुआवजा संबंधी रिकार्ड ही वर्तमान पटल प्रभारी/ रजिस्ट्रार कानूनगो नरेश चंद्र शर्मा को नहीं दिए हैं। जबकि नरेश चंद्र शर्मा इस पटल पर वर्ष 2017 से कार्यरत हैं। इस प्रकरण को लेकर सदर तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने रिकार्ड न देने पर चंद्र प्रकाश शर्मा को नोटिस देते हुए कहा कि चार साल बाद भी रिकार्ड वापस न किया जाना घोर लापरवाही है। इससे राज्य सूचना आयोग को भी सूचनाएं नहीं भेजी जा रही है। तहसीलदार ने चंद्र प्रकाश को नोटिस देते हुए यह स्पष्टीकरण मांगा है कि आपके खिलाफ इस मामले में विभागीय कार्रवाई क्यों न की जाए।
‘दैवीय आपदा से संबंधित रिकार्ड कई साल बाद भी संबंधित पटल सहायक ने नहीं दिए हैं। इसलिए यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि मुआवजा संबंधी यह रिकार्ड कहां रखे हैं। इस मामले में विभागीय कार्रवाई की जा रही है।’
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- आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार सदर
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