आंवला। कमजोर आर्थिक हालत के बावजूद बच्चों को उच्च शिक्षा देकर उनका भविष्य चमकाने की खातिर कुंवरपाल ने अपना वर्तमान खत्म कर लिया। वह कर्ज दर कर्ज लेता रहा और तमाम कोशिश के बाद भी कर्ज से उबर नहीं पाया। अपने कर्ज के साथ ही पिता का कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी भी कुंवरपाल के ही कंधों पर थी जिससे बात और बिगड़ गई।
कुंवरपाल के पिता ओमकार के नाम आठ बीघा जमीन थी। पौने चार बीघा जमीन कुंवरपाल ने खरीदी थी। ओमकार ने भमोरा की बॉब शाखा से 1.55 लाख और इफको टाउनशिप की इंडियन ओवरसीज बैंक शाखा से 95 हजार रुपया अपनी आठ बीघा जमीन के कागज दिखाकर लोन लिया था। कुंवरपाल ने पौने चार बीघा जमीन का इकरारनामा सेंधा निवासी शख्स से करके 3.35 लाख रुपये का कर्ज छह महीने पहले लिया था। बीस हजार का एक और लोन लिया तो गांव और परिचित लोगों से करीब दो लाख का अतिरिक्त लोन लिया। इस तरह कुंवरपाल ने मेंथा प्लांट लगाया पर इसमें घाटा होने के बाद वह और फंस गया। लगातार तीन साल से खेती में अलग नुकसान हो रहा था। पिता के मुताबिक कर्ज के ब्याज की करीब 25 हजार रुपये महीने की किस्तें अलग-अलग दी जा रही थीं जो मुश्किल काम था।
पत्नी हरदेवी ने बताया कि सूद पर रकम देने वाले सेंधा गांव के शख्स को पति हर माह ब्याज नहीं दे पा रहे थे। उसका दबाव था कि वह अपनी जमीन का बैनामा उसके नाम कर दें। इसके लिए अक्सर घर आ जाते थे। दूसरे कर्जदार भी रास्ते में रोककर तगादा कर देते थे। उसके पति रकम लौटाने को समय मांग रहे थे जो नहीं दिया जा रहा था। शायद इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या कर ली।
इलाज कराने में भी असफल
- कुंवरपाल की पत्नी और दो बेटियों रचना व आरती को 15 दिन से बुखार आ रहा था। सरकारी अस्पताल में इलाज पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। गांव के झोलाछाप से दवा दिलाई तो भी लाभ न हुआ। तब शहर के अस्पताल में इलाज को रुपयों का इंतजाम करने की बात कहकर कुंवरपाल मंगलवार सुबह घर से निकले थे। देर शाम तक घर न लौटने पर परिवार ने गांव और संभावित जगहों पर तलाशने की कोशिश की।
हैदराबाद में नर्सिंग की पढ़ाई कर रहा बेटा
- गरीब कुंवरपाल ने बच्चों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। बड़े बेटे को दो साल पहले हैदराबाद के कॉलेज में बीएससी नर्सिंग में एडमिशन दिलाया। छोटा बेटा सुनील हाईस्कूल का छात्र है, बेटी रचना कक्षा 6 में और आरती चौथी की छात्रा है।