बरेली। चतुर्थ श्रेणी और संविदा कर्मियों के भरोसे चल रहे नारी शरणालय में सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। एक संवासिनी के लापता होने के बाद से पूरे स्टाफ की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह मामला भी सामने आया है कि यहां क्षमता से डेढ़ गुना संवासिनियां रह रही हैं। बताते हैं कि लावारिस मिलने वाली महिलाओं को उनके परिजनों से मिलाने की कोशिश नहीं की जाती है। इसलिए संवासिनियों की संख्या बढ़ती जा रही है। कई संवासिनियां तो यहां 20 साल से भी अधिक समय से रह रही हैं।
प्रेमनगर में बने राजकीय नारी शरणालय में एक संवासिनी के सीढ़ी के जरिये आठ फुट ऊंची दीवार फांदकर भागने के मामले में पूरा स्टाफ फंस गया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार की जांच में यह सामने आ चुका है कि रात में ड्यूटी पर तैनात महिला सुरक्षा कर्मी सोती रहीं। इस बीच महिला वहां से भाग निकली। ऐसी लचर सुरक्षा के बीच शरणालय में क्षमता से डेढ़ गुना संवासिनियां रह रही हैं। स्टाफ का कहना है कि यहां मानसिक मंदित सहित 125 महिलाओं के रहने की क्षमता है, लेकिन इस समय वहां 181 संवासिनियां रह रही हैं। रात में अधीक्षिका के न ठहरने से इन सभी महिलाओं की जिम्मेदारी संविदा, महिला होमगार्ड और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दी जाती है। अधीक्षिका छाया बढ़वल का कहना है कि वह संवासिनियों के घर का पता लगाने के लिए मंडल में तो स्टाफ को भेज देती हैं, लेकिन अन्य जगहों पर चिट्ठी भेजने का ही इंतजाम है। उधर गायब हुई संवासिनी का कुछ पता नहीं चल पाया है। बंगाल में उसके बताए गए पते पर भी चिट्ठी भेजी गई थी लेकिन उससे कोई जानकारी हासिल नहीं हो सकी है।
‘संवासिनियों को उनके परिजनों से मिलाने की कोशिश की जाती है, लेकिन मानसिक मंदित या बेसहारा बुजुर्गों को उनके घर जल्द भेजना मुमकिन नहीं हो पाता है।’
-छाया बढ़वल, अधीक्षिका