बरेली। सपा शासन में किए गए घोटालों का भाजपा शासन में हिसाब मांगे जाने से अफसर घबराए हुए हैं। गरीबों और विधवाओं की पेंशन स्कीमों में भी लाभार्थियों के फर्जी नामों के आधार पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी का मामला भी कई अफसरों के गले पड़ गया है। शासन के निर्देश पर विजिलेंस ने इसकी जांच शुरू की है, लेकिन अफसर रिकॉर्ड मुहैया कराने में आनाकानी कर रहे हैं। विजिलेंस ने एक बार फिर समाज कल्याण विभाग से बतौर पेंशन जारी की गई धनराशि का रिकॉर्ड मांगा है।
विधवाओं, दिव्यांग और वृद्धावस्था पेंशन स्कीमों में वर्ष 2012-13 के दौरान करोड़ों का गोलमाल किए जाने की शिकायत शासन में हुई थी। बताया जाता है कि फर्जी नामों के आधार पर बैंक स्टाफ की सांठगांठ से खाते खुलवाए गए और फिर उनमें कई करोड़ की सरकारी रकम को ट्रांसफर कर उसे हजम कर लिया गया था। जिन फर्जी नामों से खोले गए खातों में रकम ट्रांसफर हुई थी, उनमें से ज्यादा सहकारी बैंक की शाखाओं में खोले गए थे। शासन के आदेश पर इस मामले की जांच विजिलेंस ने शुरू की है। विजिलेंस ने जांच शुरू करने के बाद करीब चार महीने पहले बैंक स्टेटमेंट समेत इस घोटाले से सबंधित दूसरे रिकार्ड मांगे थे लेकिन विभागों ने ये रिकॉर्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराए हैं।
अब विजिलेंस की ओर से समाज कल्याण विभाग को रिमाइंडर जारी किया गया है। मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह और सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने भी विजिलेंस को रिकॉर्ड न देने पर नाराजगी जताई है। हर तरफ से शिकंजा कसने के बाद समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित ने जिला दिव्यांगजन एवं सशक्तीकरण अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी तक पेंशन स्कीमों से संबंधित रिकार्ड तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
पेंशन स्कीमों में गड़बड़ी करके सरकारी रकम के दुरुपयोग का मामला शासन में पहुंचने के बाद इसकी जांच चल रही है। पेंशन जारी करने वाले संबंधित विभागों को बैंक के रिकार्ड सहित दूसरे कागज अतिशीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है। -अशोक दीक्षित, जिला समाज कल्याण अधिकारी