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डीएचओ से झगड़ा करने वाले विवादित डीडी आजमगढ़ भेजे गए

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बरेली। अपने दामन पर तमाम दाग होने के बावजूद हाल ही में जिला उद्यान अधिकारी पूजा के खिलाफ मुहिम चलाकर प्रशासन के एक आला अफसर की मदद से उनका रामपुर ट्रांसफर करा देने वाले उपनिदेशक आखिरकार खुद भी नहीं बच पाए। उनका कारगुजारियां मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची तो उन्हें भी नाप दिया गया। शासन के प्रमुख सचिव की ओर से उन्हें आजमगढ़ भेजने का फरमान जारी किया गया है।
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काफी समय से बरेली में जमे उपनिदेशक मनोहर सिंह का शुरू से ही विवादों से करीबी नाता रहा। शाहजहांपुर में डीएचओ रहते हुए वह किसानों की सब्सिडी की हेराफेरी के मामले में फंसे थे। इसके अलावा वहां दफ्तर में लगी आग में काफी रिकार्ड जलने पर भी उन पर अंगुलियां उठी थीं। मेरठ में भी तैनाती के दौरान कई विवादों में उलझे रहे। करीब दो साल पहले उनकी तैनाती बरेली में बतौर उपनिदेशक हुई तो यहां जिला उद्यान अधिकारी पूजा से उनकी जंग शुरू हो गई। पूजा ने उन पर खुलकर नियम विरुद्ध कामों के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया। दोनों के बीच काफी समय शीतयुद्ध चला। लोकसभा चुनाव में आचार संहिता लगने से पहले मनोहर सिंह ने डीएचओ पूजा का रामपुर तबादला करा दिया। मगर आचार संहिता खत्म होते ही पूजा का ट्रांसफर शासन ने फिर बरेली कर दिया। इसके बाद दोनों के बीच फिर जंग शुरू हो गई।
इस बार मनोहर सिंह को प्रशासन के कुछ आला अफसरों से भी मदद मिली। भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जा चुके और दो-दो विजिलेंस जांच का सामना कर रहे उपनिदेशक की शिकायतों पर डीएचओ के खिलाफ शासन को कई विभागीय पत्र लिखे गए जिसके उन्हें फिर रामपुर भेज दिया गया। मगर इससे पहले डीएचओ पूजा ने भी उपनिदेशक का कच्चा चिट्ठा भी अफसरों को भेज दिया जो मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया। इसके बाद उपनिदेशक की पैरवी कर रहे उच्चाधिकारी बैकफुट पर आ गए। बुधवार को शासन ने उपनिदेशक मनोहर सिंह को आजमगढ़ भेजने का फरमान जारी कर दिया। हालांकि उनकी जगह अभी यहां किसी की तैनाती नहीं की गई है।
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बड़े साहब फिर पैरवी में जुटे
शासन का आदेश आने के बाद भी उपनिदेशक मनोहर सिंह को रिलीव नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो वह अपना तबादला रुकवाने में जुटे हुए हैं। बड़े साहब एक बार फिर से उनको बरेली में रोकने की पैरवी कर रहे हैं। हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि पुराने कारनामों की वजह से उनका निलंबन भी हो सकता है। भ्रष्टाचार के मामलों की आंच निदेशालय तक भी फैल सकती है। बता दें कि उपनिदेश के खिलाफ केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने भी कार्रवाई के लिए लिखा था, लेकिन एक बड़े अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में विवादित उपनिदेशक को कर्मठ बता दिया था। इसी रिपोर्ट की आड़ में उपनिदेशक लंबे समय तक बरेली में पारी खेलते रहे।
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