बरेली। करोड़ों की कीमत की करीब 125 बीघा जमीन की मिल्कियत पाने के लिए एक विधवा को यह साबित करना है कि उसने जो बच्चा जन्मा है, वह उसकी दूसरी शादी का नतीजा नहीं बल्कि उसका जन्म सरोगेसी यानी किराए पर कोख देने की वजह से हुआ है। दरअसल इस महिला की ननद और ननदोई ने दावा ठोका है कि उसने पति की मृत्यु के बाद दूसरी शादी कर ली है, इसलिए अपने ससुर की विरासत पर अब उसका कोई हक नहीं है। यह मामला शासन में पहुंचने के बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने एडीएम सिटी महेंद्र कुमार को जांच के आदेश दिए हैं।
मामला नवाबगंज तहसील के एक गांव के रहने वाले जगन्नाथ नाम के एक शख्स से जुड़ा हैै। शासन में पहुंचे मामले के मुताबिक जगन्नाथ के दो बेटे और एक बेटी है। बड़े बेटे का शादी के कुछ ही दिन बाद जमीन विवाद में मर्डर हो गया था। परिवार पर खतरा मंडराता देख जगन्नाथ ने पीलीभीत में रहने वाले सोमपाल नाम के एक व्यक्ति को अपने घर-परिवार की मदद के लिए 40 बीघा जमीन देकर अपने गांव में रहने की जगह दे दी। इसके बाद जगन्नाथ के अविवाहित छोटे बेटे की भी मौत हो गई। इसके कुछ ही दिन बाद जगन्नाथ और उनकी पत्नी भी इस दुनिया से चले बसे। हालांकि उन्होंने जीते-जी अपनी बेटी की शादी कर गए थे। जगन्नाथ के परिवार में केवल बड़े बेटे की विधवा ही रह ही है और ससुर की करीब सवा सौ बीघा जमीन पर अब अकेले उसका ही हक बाकी है। सोमपाल की पत्नी की भी मृत्यु हो चुकी है।
कुछ गांव के लोग और विधवा की ननद और ननदोई का कहना है कि सोमपाल और जगन्नाथ की विधवा बहू के संबंध हो गए हैं। वर्ष 2008 में विधवा ने एक बच्चे को भी जन्म दिया है। इस आधार पर महिला के पुनर्विवाह की बात कहते हुए उसे जमीन से बेदखल करने का दावा किया गया है। जबकि विधवा और सोमपाल का कहना है कि उन दोनों के बीच सरोगेसी से बच्चा पैदा करने का एग्रीमेंट हुआ है। इसके लिए पुनर्विवाह का दावा ठीक नहीं है। दूसरे पक्ष का कहना है कि यह बच्चा रामपुर गार्डन के एक हॉस्पिटल में हुआ था। इसमें बच्चे के पिता के तौर पर सोमनाथ का नाम दर्ज है जबकि जमीन के एक बैनामे में महिला के पति के रूप में जगन्नाथ के बड़े बेटे का नाम लिखा है। एडीएम सिटी ने इस मामले की जांच शुरू करते हुए दोनों पक्षों के बयान लेने शुरू कर दिए हैं।
नवाबगंज तहसील क्षेत्र से जुड़ा यह मामला बेहद पेचीदा है। कमिश्नर के आदेश के बाद इसमें दोनों ही पक्षों से बात कर तथ्यों को एकत्र किया जा रहा है। पूरी तरह संतुष्टि के बाद ही इसमें कोई निर्णय लिया जाएगा। -महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी