बरेली। अब मानव तस्करी और बाल शोषण के पीड़ितों को भी दलित उत्पीड़न की तर्ज पर आर्थिक मदद दी जाएगी। दलित उत्पीड़न में तो सवर्णों की ओर से उत्पीड़न करने पर व्यवस्था है लेकिन इस तरह के मामलों में तो सभी वर्ग के आरोपी के होने पर मदद मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के गृह विभाग ने यह आदेश जारी किया है। जिसके आधार पर एडीएम (सिटी) ने एसएसपी से इस तरह के मामलों का ब्योरा मांगा है।
प्रदेश के गृह सचिव कमल सक्सेना ने आदेश में कहा है कि बच्चों को आर्थिक मदद उनके संरक्षण के उद्देश्य से प्रदान की जाएगी। तीन महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका के आधार पर देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिव को व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। जिसमें आर्थिक मदद के लिए राज्य सरकार को अपने स्तर से अलग-अलग व्यवस्था करने को कहा गया था।
इस आदेश के बाद जिले में बालकों के शोषण, लैंगिग हमला, अश्लील प्रयोजन के लिए बच्चों के इस्तेमाल के मामलों का ब्योरा तलाशा जा रहा है। सभी थानों से जानकारी एकत्रित की जा रही है। इनके लिए आवेदन जिला विविध सेवा प्राधिकरण में पीड़ित को करने होंगे। जिनका परीक्षण और निस्तार डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। जिसमें एसएसपी, एसपी (ग्रामीण), एडीएम (सिटी) तथा एडीएम (प्रशासन) भी होंगे।
इनको मिलेगी क्षतिपूर्ति
दुष्कर्म के मामले में दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। इसी तरह मानसिक क्षति पर एक लाख और इसी तरह के मामले में मृत्यु होने पर डेढ़ लाख। मानव तस्करी से पीड़ित को दो लाख, लैंगिग हमले पर एक लाख। गुरुत्तर लैंगिग हमले के मामले में डेढ़ लाख, लैंगिग उत्पीड़न के मामले में एक लाख तथा अश्लील प्रयोजन के लिए बच्चों के इस्तेमाल करने पर एक लाख रुपये की आर्थिक मदद क्षतिपूर्ति के बारे में दिए जाने के आदेश किए हैं।