सपा सरकार के कद्दावर मंत्री के गुरु कहे जाने वाले सरकारी गनर प्राप्त पॉवरफुल बाबा की मनमानी के आगे बीडीए के अफसर भी पस्त हो गए। बाबा की अवैध दुकानों का निर्माण ढहाने के लिए बीडीए में ढाई महीने तक ध्वस्तीकरण आदेश दबा पड़ा रहा। छह दुकानें लगातार बनती रहीं। ये आदेश अमल में नहीं लाया गया और दुकानें बनकर तैयार हो गईं।
प्रेमनगर में धर्मकांटा के सामने छह दुकानें बीडीए से बिना नक्शा स्वीकृत कराए बनवा लीं गई। सरकारी जमीन का भी कुछ हिस्सा दबा लिया गया। ये दुकानें मार्च-अप्रैल से ही बन रही हैं। बीडीए ने मई में अनाधिकृत निर्माण मानकर चालान किया। 20 मई को बीडीए ने इन दुकानों के ध्वस्तीकरण के आदेश पारित कर मजिस्ट्रेट और फोर्स मांगी। ये आदेश ढाई महीने तक दबा रहा। तब तक छह दुकानें अनाधिकृत तरीके से बनकर तैयार हो गईं। बीडीए के एई और जेई समेत अन्य अफसर भी बाबा की दुकानों पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।
हालांकि अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद दुकानों का निर्माण बंद करा दिया गया है। दुकान के बाहर बाबा जी के नाम का बोर्ड लगा दिया गया है। दुकानें के पीछे मंदिर के पुजारी ने इस मामले में कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
‘प्रेमनगर में धर्मकांटा के सामने बनने वाली दुकानों का चालान काटा था और ध्वस्तीकरण के आदेश भी हुए थे। मजिस्ट्रेट और पुलिस न मिलने की वजह से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो सकी। एसपी सिटी ने 15 अगस्त तक फोर्स उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई है। इसके बाद फोर्स उपलब्ध होने पर अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी।’ अजय कुमार, उप सचिव बीडीए