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या-हुसैन अलविदा, या-इमाम अलविदा

Thu, 13 Oct 2016 01:49 AM IST
बरेली, ब्यूरो
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moharram
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माहे मुहर्रम की बुधवार को दस तारीख पर शहर के सभी इमामबाड़ों में मातमी सदाएं बुलंद होती रहीं। जुलूस लेकर करबला पहुंचे, मातम किया और ताजियों को दफन किया गया।
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यौम-ए-आशुरा के मौके पर सबसे पहले शिया आसफी जामा मस्जिद व मस्जिद कंबोहान में आमाल कराए गए। इसके बाद गढै़या के इमामबाड़ा वसी हैदर से अंजुमन गुलदस्ते हैदरी व अंजुमन आल इंडिया गुलदस्ते हैदरी की ओर से जुलूस बरामद हुए। ये दोनों जुलूस निर्धारित मार्गों से होते हुए किला सब्जी मंडी स्थित कोठी नवाब नब्बू साहब पर पहुंचा। यहां आयोजित मजलिस को मौलाना जफरुल हसन ने खिताब करते हुए जंगे करबला का विस्तार से वर्णन किया।  
इसके बाद यहां से नौजवानों और बच्चों ने जंजीरी व चाकू का मातम शुरू किया। इससे उनका जिस्म लहूलुहान हो गया। इससे वहां की जमीन तक खून से लाल हो गई। इस दौरान हसनैन रजा आब्दी ने खुतबा पढ़ा- उजड़ा है करबला में भरा घर हुसैन का, दर-दर फिरा है दश्त में कुनबा हुसैन का... ने जंजीरी मातम करने वालों को भावुक कर दिया। जंजीरी मातम का यह दस्ता मातम करता हुआ छीपी टोला स्थित इमामबाड़ा फतेह अली शाह पहुंचा, जहां आयोजित मजलिस को मौलाना हामिद अली जैदी ने खिताब किया। इसके बाद जनाबे अली असगर के ताबूत की जियारत कराई गई। 
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इसके बाद यहां से अंजुमन शमशीरे हैदरी, अंजुमन परचमे अब्बास, अंजुमन कारवाने हुसैन, अंजुमन हुसैनी पुराना शहर व अंजुमन परचमे हुसैन की ओर से जुलूस निकाले गए। ये सभी जुलूस नौहा ख्वानी व सीनाजनी करते हुए स्वाले नगर स्थित रौजा-ए-इमाम हुसैन करबला पहुंचकर समाप्त हुए, जहां आखिर में ताजिए दफन किए गए। जुलूस के दौरान या-हुसैन अलविदा, या-इमाम अलविदा व लब्बैक या-हुसैन की सदाएं भी बुलंद होती रही। 

शाम-ए-गरीबा की मजलिस  
बरेली। मगरिब की नमाज के बाद गढै़या के इमामबाड़ा हकीम आगा साहब में रात के अंधेरे में शाम-ए-गरीबा की मजलिस आयोजित की गई। इसमें मौलाना जफरुल हसन ने करबला की शहादत के बाद फौजे यजीद के इमाम हुसैन के कुनबे पर किए गए अत्याचारों का वर्णन किया। मजलिस के बाद हजरत इमाम हुसैन के ताबूत की जियारत कराई गई। इसे देखकर वहां मौजूद लोग रोने लगे और पूरा इमामबाड़ा ...या हुसैन की सदाओं से गूंज उठा। इसके अलावा इमामबाड़ा वसी हैदर, इमामबाड़ा फतेह अली शाह मारूफ  काला इमामबाड़ा, बैरिस्टर साहब इमामबाड़ा पर भी मजलिसें शाम-ए-गरीबा का आयोजन किया गया।
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