जय श्रीराम और या अली की सदाएं एक साथ गूंजी, वह भी इसलिए क्योंकि एक गाय की जान खतरे में थी। बात शहर के सुभाषनगर इलाके की है। पाल कालोनी के निकट रहने वाले जकी अब्बास सुबह फज्र की नमाज पढ़ने उठे तो गाय के चिल्लाने की आवाज सुनी। पास जाकर देखा तो एक गाय नाले में गिरी हुई थी। वह बुरी तरह जख्मी हो चुकी थी। उन्होंने तुरंत आसपास के लोगों को सूचित किया। इस पर पास के ही समाज सेवी इसराफील खान राश्मि साथियों के साथ मौके पर पहुंचे और इसकी सूचना थाना सुभाष नगर को दी। वहां से पुलिस आई तो उन्हीं से पशु सेवक धीरज पाठक को फोन कराया। धीरज भी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए।
गाय को बचाने के लिए मुस्लिम और हिंदू दोनों पक्षों के लोगों ने नाले में उतरने से भी परहेज नहीं किया। हिंदू पक्ष ने जय श्रीराम के नारे के साथ गाय को निकालने के लिए जोर लगाया और मुस्लिमों से कहा कि वो भी अली का नाम लेकर जोर लगाएं। फिर दोनों पक्षों ने जय श्री राम और या अली मदद के नारे के साथ गाय को निकाल लिया। गाय किसकी है, यह अभी पता नहीं चला है। लिहाजा क्षेत्र के लोगों ने गाय के लिए वहीं पर टैंट का आशियाना बना दिया है। गाय काफी जख्मी है और गर्भ से भी है। लिहाजा पहले लोगों ने खुद ही मरहम-पट्टी की और बाद में डाक्टर को बुला कर दिखाया। अब गाय की सेवा मोहल्ले के लोग कर रहे हैं। इसमें सहयोग करने वालों में गुलाम उद्दीन, शानू, अकील, माजिद, आकाश, अमित, सैफ उल्ला खान, फैजल खान, राजा और अब्दुल रहमान आदि शामिल हैं। सुभाष नगर की यह घटना सांप्रदायिक सद्भावना का उदाहरण बन गई। हालांकि बरेली का मिजाज हमेशा से यही रहा है, लेकिन ऐसे तमाम उदाहरणों में एक और मिसाल शहर के नाम जुड़ गई।
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गोरक्षा अपने आप में महत्वपूर्ण है, मगर बेजुबान पशु की सेवा हर इंसान का फर्ज बनता है। इस तरह के जितने भी घूमनेे वाले पशु हैं, उनके लिए खाने और सुरक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए। अलबत्ता गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी और राजनीति नहीं होनी चाहिए। - इसराफील खान राश्मि, जन सेवक
गाय की जान बचाने में मुस्लिम भाईयों ने जिस तरह तत्परता दिखाई, वो सराहनीय और जज्बे की बात है। पशु की सेवा करना पुण्य का काम है। इस तरह काम का सभी को मिलकर करना चाहिए। इससे सौहार्द और आपसी प्रेम को बढ़ावा मिलता है। -धीरज पाठक, पशु सेवक