जिले में ‘छोटू’ को पकड़कर ऑपरेशन मुस्कान कार्यक्रम मना लिया गया। इस ऑपरेशन मुस्कान ने मासूमों के चेहरों पर कितनी मुस्कान दी यह कह पाना मुश्किल है। क्योंकि महीने भर चले कार्यक्रम में छुड़ाए गए 23 बाल श्रमिकों में से दस का परिवार उनकी मजदूरी के सहारे ही चल रहा था। नियम मुताबिक, बाल श्रमिकों का पुनर्वास भी कराया जाना चाहिए पर जिला प्रोवेशन विभाग ने इसके लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं।
0 23 बाल श्रमिकों को छुड़ाया
मानव तस्करी निषेध इकाई और श्रम विभाग ने कुल 23 बाल श्रमिकों को ऑपरेशन मुस्कान के तहत छुड़ाया शहर के होटल और दुकानों से मुक्त कराया है। 28 और 29 जुलाई को टीम ने कुल 13 बच्चों को छुड़ाया, जो कलकत्ता(प. बंगाल), सैटेलाइट, सुभाषनगर, सीबीगंज, किला व बारादरी थाना क्षेत्र के हैं। इससे पहले 10 बच्चों को छुड़ाया गया, जो अति गरीब थे।
0 यह है ऑपरेशन मुस्कान के उद्देश्य
- लावारिस बच्चों को सुरक्षित आश्रय दिलाना।
- नशा में लिप्त बच्चों को मुक्त कराना।
- बिछुड़े बच्चों को परिवार से मिलवाना।
- बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर पुनर्वास।
0 पचा रहे आर्थिक अनुदान का रूपया
ऑपरेशन मुस्कान की टीम बाल श्रमिकों को जिन दुकानों से पकड़ती है, उस प्रत्येक दुकानदार पर बीस से पचास हजार रूपए का आर्थिक दंड लिया जाता है। नियम है कि इस दंड की मूल राशि के ब्याज को उस बच्चे को प्रतिमाह सहायता राशि के रूप में दिया जाए।
0 चाइल्ड लाइन ने दिलाई ‘असली मुस्कान’
इस अभियान के दौरान कुछ बच्चों के चेहरे में असली मुस्कान भी आई। पांच महीने से शरणालय में रह रहे 11 वर्षीय विपुल को टीम ने उसके परिवार से मिलाया। चाइल्ड लाइन के रमनजीत ने बताया कि 27 फरवरी को आरपीएफ ने विपुल को उन्हें सौंपा था। बच्चा सिर्फ अपने शहर अलीगढ़ का नाम बता पा रहा था। शनिवार को उसके पिता महेंद्र आकर उसे ले गए। उनका कहना था कि बच्चा मिलने की उम्मीद वे छोड़ चुके थे। टीम ने केरल में लापता बरेली के बच्चे का पता ढूंढकर उसकी मां को सूचना दी है। बच्चा केरल पुलिस को मिला था, वह नवाबगंज के जैट मुड़िया का रहने वाला है।