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बरेली नाला हादसा: शहर में खुले नाले बन रहे जानलेवा, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान

Thu, 26 Mar 2026 04:27 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली के सेटेलाइट बस अड्डे पर खुला नाला एक युवक की मौत का कारण बना है। शहरभर में ऐसे तमाम नाले हैं जो गहरे हैं, जो हादसे का सबब बन सकते हैं। 
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लल्ला मार्केट के पास खुला बड़ा नाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में शहरभर के खुले नाले लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। सेटेलाइट के अलावा शहर में ऐसे तमाम नाले हैं जो गहरे हैं, लेकिन वहां सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। दिनभर में हजारों की आबादी हादसे की आशंका के बीच इन नालों के पास से आवागमन करती है। बता दें कि सेटेलाइट बस अड्डे पर खुले नाले में गिरने से युवक की मौत हो गई थी। 30 घंटे बाद उसका शव निकाला जा सका। 

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शहर में जल्द ही स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम आने वाली है। इसके बाद भी जिम्मेदार खुले नालों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शहर के गहरे नालों के पास न तो संकेतक लगा है और न ही उनके ऊपर कोई स्लैब पड़ा हुआ है। हर साल नालों पर लाखों रुपये की रकम खर्च हो रही है, इसके बाद भी लोग नालों में गिर रहे हैं। बुधवार को पड़ताल के दौरान ज्यादातर नालों की स्थिति खराब मिली।

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लल्ला मार्केट रोड
धर्मकांटे से कोहाड़ापीर की ओर जाने वाली रोड के किनारे झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार के आवास के पास खुला नाला है। पास में ही प्रदेश के वनमंत्री डॉॅ. अरुण कुमार का कार्यालय है। इस पूरे नाले को कुछ जगहों पर ढंककर ही रस्मअदायगी कर दी गई है। नाले के ऊपर जगह-जगह अतिक्रमण भी हैं।

प्रेमनगर नई बस्ती रोड पर खुला पड़ा नाला - फोटो : अमर उजाला
चौपुला पुल के पास
शहर के बीचों बीच बने चौपुला पुल से किला पुल तक कई जगह गहरे नाले खुले हैं। दिनभर यहां पर यातायात का भारी दबाव रहता है, इसके बाद भी नगर निगम इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। पुलिस माॅडर्न स्कूल, सिटी स्टेशन के पास, जसौली प्राथमिक स्कूल के पास नाला खुला हुआ है। स्कूल आते और जाते समय कई बच्चे पैदल ही इन नालों के पास से गुजरते हैं।

नई बस्ती प्रेमनगर
वार्ड-2 जाटवपुरा में बने नाले के पास ऐसा कोई भी संकेतक नहीं लगा है, जिससे ये पता चल सके कि आगे गहरा नाला है। नई बस्ती की इस रोड से हर रोज हजारों लोगों का आवागमन होता है। नाले पर स्लैब न होने से घरों से निकलने वाला कूड़ा भी लोग नाले में ही डाल देते हैं।इसके चलते आसपास के लोग बदबू की वजह से परेशान रहते हैं।

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि शहर के गहरे नालों के पास संकेतक लगाए जा रहे हैं। जाे नाले ज्यादा गहरे हैं, उनके ऊपर स्लैब डलवाए जाएंगे। कुछ जगहों पर काम चल भी रहा है।
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रोडवेज अधिकारियों ने नगर निगम को लिखे कई पत्र... फिर भी न सफाई की, न नाले ढके
सेटेलाइट बस अड्डा बेहद व्यस्त इलाका है। यहां रोजाना यूपी समेत आसपास के पांच राज्यों की 350-400 बसों और औसतन 32-35 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। रोडवेज के अधिकारियों ने नालों की सफाई कराने और खुले नालों को ढकने के लिए कई बार नगर निगम को पत्र लिखे, लेकिन जिम्मेदारों ने सुध नहीं ली। नतीजा इस हादसे के रूप में सामने आया है।

रुहेलखंड डिपो के एआरएम अरुण कुमार वाजपेयी ने बताया कि पिछले साल सफाई के नाम पर बस अड्डे के एक ओर के नाले के स्लैब को तोड़ दिया गया। कई महीनों तक स्लैब वहां पड़ा रहा। कई बार नगर निगम को लिखने के बाद स्लैब हटाया गया। दूसरा स्लैब अब तक नहीं डाला गया है। इसके कुछ दिन बाद एक और स्थान पर नाला खोल दिया गया। नाले से निकले कचरे को नहीं हटाया गया और स्लैब भी नहीं डाला गया। 

आठ मई 2025 को उन्होंने खुद नगर निगम को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटवाने, सफाई कराने और नाला ढकने के लिए कहा। इसके बाद सेटेलाइट बस अड्डा प्रभारी ने भी कई पत्र लिखे। होली के दौरान खुले नालों से हादसा न हो इसको देखते हुए और सफाई कराने के लिए स्टेशन प्रभारी ने 10 फरवरी को भी नगर निगम को पत्र लिखा। इसके बावजूद आज तक कार्रवाई नहीं हुई। एआरएम ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से बस अड्डे पर चौकीदारों की संख्या को बढ़ा दिया गया है।
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