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Bareilly News: रैबीज क्लीनिक प्रभारी के भरोसे ओपीडी, इलाज के लिए भटके मरीज

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विशेषज्ञ चिकित्सक के कक्ष में ताला लगा रहा, 110 लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगी
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बरेली। त्योहार पर आधे दिन के लिए खुल रही सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में इलाज के बजाय मरीजों का दर्द बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को ओपीडी खुली, लेकिन ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सक के कक्ष में ताला लगा रहा। रैबीज क्लीनिक प्रभारी ने मरीजाें को देखा और दवाएं दीं।
तीन सौ बेड अस्पताल में सुबह नौ बजे तक कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा। इलाज के लिए कतार में मरीज देखने के बाद प्रभारी सीएमएस के निर्देश पर रैबीज क्लीनिक प्रभारी डॉ. फैसल ने फिजिशियन कक्ष में मरीजों को देखा। नेत्र रोग ओपीडी में जूनियर डॉक्टर ने मरीजों को देखा। डॉक्टर के कक्ष में ताला लगा देख कई मरीज पर्चा बनवाने के बाद बिना इलाज ही लौटने को विवश रहे। कुछ मरीजों ने निजी अस्पताल तो कुछ इलाज के लिए जिला अस्पताल रवाना हुए। रिकॉर्ड के अनुसार तीन सौ बेड अस्पताल में दोपहर 12 बजे तक 160 मरीज इलाज के लिए पहुंचे।
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दूसरी ओर, 110 लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगी। ज्यादातर लोग कुत्ते के हमले में जख्मी हुए थे। वहीं, नेत्र रोग ओपीडी में आंखों में जलन, पानी निकलने, दर्द और भारीपन की शिकायत रही। दूसरी ओर, जिला अस्पताल में डॉक्टर समय से ओपीडी में बैठे। 288 मरीजों को देखा।

नहीं मिली व्हीलचेयर, गोद में लेकर पहुंचे परिजन
तीन सौ बेड अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे सुभाषनगर के राजेंद्र को परिजन गोद में उठाकर फिजिशियन कक्ष तक पहुंचे। स्टाफ का दावा था कि अस्पताल में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर मौजूद है। ऑटो से उतरते ही परिजन सीधे गोद में लेकर चल पड़े। परामर्श के बाद वापसी के दौरान उन्हें व्हीलचेयर लेने के लिए कहा गया तो इन्कार कर दिया। ब्यूरो

मरीज बोले- डॉक्टर नहीं थे तो बंद कर देते ओपीडी
- दो दिन से पेट फूल रहा था। सांस लेने में तकलीफ होने पर इलाज के लिए अस्पताल आए थे। डॉक्टर बैठे नहीं थे, इसलिए निजी अस्पताल जा रहे हैं। - मुकेश कश्यप, मरीज
- त्योहार पर ओपीडी में कोई डॉक्टर ही नहीं बैठा तो बंद कर देना चाहिए था। नरियावल से बच्चे को लेकर इलाज के आए अब वापस लौटना पड़ रहा है। - अनिल कुमार, परिजन
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- शासनादेश के तहत सार्वजनिक अवकाश में आधे दिन की ओपीडी रही। रोस्टर के तहत जिन डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई थी, व्यक्तिगत वजह से अवकाश ले लिया। शुक्रवार से सभी डॉक्टर मौजूद रहेंगे। - डॉ. इंतेजार हुसैन, प्रभारी सीएमएस, तीन सौ बेड अस्पताल
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