जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजाें की भीड़ को संभालना मुश्किल हो रहा है। मंगलवार को नवीन तैनाती पर आए एक चिकित्सक ज्वाइनिंग के तीसरे दिन ही इस्तीफा देकर चले गए। हालांकि इस्तीफे कारण उन्हाेंने पारिवारिक कारण बताया है। लेकिन रविवार को मरीज देखने के बाद उनके द्वारा इस्तीफा देने का फैसला मंगलवार को लिया गया जिससे अस्पताल में पूरा दिन डॉक्टर का इस्तीफा चर्चा का विषय बना रहा।
यूपीएचएसएसपी (यूपी हेल्थ स्ट्रेथिंग सिस्टम प्रोग्राम) के तहत रिटायर्ड डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने जिला अस्पताल में शनिवार को नवीन तैनाती ली थी। डॉ. वर्मा नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं लेकिन उन्हें ईएमओ बनाकर भेजा गया। यहां पहले से ही तीन ईएमओ नए आ गए हैं। इसलिए ओपीडी में मरीजाें की भीड़ देखते हुए उन्हें जनरल ड्यूटी पर लगाया गया। रविवार को छुट्टी के बावजूद दोपहर दो बजे तक कक्ष संख्या 14 में उन्होंने करीब 12 मरीज देखे। सोमवार को भी वह आए। लेकिन मंगलवार को उनके न आने पर ओपीडी की व्यवस्था चरमरा गई। 2300 से अधिक मरीज ओपीडी में आए थे। डॉक्टर वर्मा सुबह ही इस्तीफा देकर चले गए। उन्हाेंने अपने इस्तीफे में बताया है कि वह पारिवारिक कारणाें से इस्तीफा दे रहे हैं।
‘डॉ. आलोक वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। उन्हाेंने तीन दिन पहले ही ज्वाइन किया था। इस्तीफे में कारण उन्होंने पारिवारिक बताया है।’
डॉ. वीके धस्माना, प्रवक्ता, जिला अस्पताल
लाइन लगाकर हुई पैथालजी में जांच
डेंगू और मलेरिया के सीजन में मरीजाें को अपने खून के नमूने देने के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टराें द्वारा जांच लिखने के बाद कलेक्शन सेंटर पर लंबी लाइन लगती है। बीमार मरीज खड़े- खड़े परेशान हो रहे हैं। मंगलवार को 80 से अधिक मरीजों के सैंपल लिये गए हैं।
पोस्टमार्टम को लेकर डॉक्टर मुखर
पोस्टमार्टम ड्यूटी में 55 साल से अधिक उम्र के डॉक्टराें को शामिल किये जाने पर जिला अस्पताल के डॉक्टर मुखर हैं। उनका कहना है कि उनके पास पहले से ही बहुत लोड है ऐसे में 55 साल से अधिक उम्र के डॉक्टरों को ड्यूटी पर न लगाकर सीएचसी और पीएचसी के डॉक्टरों को लगाह्यया जाए। मंगलवार को डॉ. राजकुमार, डॉ. वागीश वैश्य, डॉ. वीके धस्माना, डॉ. अजय मोहन अग्रवाल, डॉ. एमएल शर्मा व अन्य ने एडी हेल्थ डॉ. सुबोध शर्मा को पत्र सौंपा है।