सामूहिक विवाह के आयोजन के लिए समाज कल्याण अधिकारी कागजी घोड़े दौड़ाने में लगे हैं। नगर निकायों को चिट्ठी लिखने के साथ ही डीएम से भी आग्रह किया है कि स्थानीय निकाय और बीडीओ पर सख्ती किए बगैर सामूहिक विवाह कराया जाना मुमकिन नहीं है।
प्रदेश सरकार 476 गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह के लिए समाज कल्याण विभाग को 1.66 करोड़ का बजट जारी कर चुकी है। इस रकम से स्थानीय निकायों और बीडीओ को विवाह कार्यक्रम का आयोजन कराना है, लेकिन इसके लिए आवेदन ही जमा नहीं हो सके हैं। पहले सामूहिक विवाह के लिए 22 जनवरी की तिथि तय की गई थी लेकिन आवेदन नहीं आए। लिहाजा सात फरवरी की तारीख तय कर दी गई लेकिन फिर भी आयोजन स्थगित हो गया। नगर निगम में केवल पांच फार्म ही जमा हुए हैं। नगर निकायों और बीडीओ के दिलचस्पी न लेने से सामूहिक विवाह के आयोजन की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। इधर, सामूहिक विवाह में लगातार देरी से परेशान समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित ने बताया कि वह डीएम से अनुरोध कर रहे हैं कि बिना सख्ती के आयोजन संभव नहीं है।