दुकानों पर बिक रहे मांस की भी परख सकते हैं गुणवत्ता
डॉ. तालुकदार के मुताबिक, दूसरी किट दुकानों पर बिक रहे मांस की गुणवत्ता परखने में सक्षम है। ये सेंसर कागज की स्टि्रप जैसा है। इससे घर पर मांस की गुणवत्ता परखने के लिए मीट का थोड़ा हिस्सा लेकर उसे पीसकर पानी में घोलना होगा। घोल में किट को डालें।
हरे रंग की ये किट रंग न बदले तो मांस शुद्ध है। खराब मांस के संपर्क में आने पर इसका रंग नीला हो जाएगा। किट के विकास में आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त का खास योगदान रहा। उन्हीं के मार्गदर्शन में प्रेजेंटेशन, व्यवसायीकरण की तैयारी है।
फूल-फल और पत्तों से बनाई किट, इसलिए कीमत कम
डॉ. तालुकदार ने बताया कि दोनों किट की कीमत एक रुपये से भी कम होगी, क्योंकि इन्हें फूल-पत्तियों और फलों की डाई से बनाया गया है। देश में बिकने वाले मांस में 50 फीसदी हिस्सेदारी चिकन मीट की है। इसलिए सेंसर किट तैयार करने के लिए चिकन मीट पर शोध किया गया।