रामपुर के सीआरपीएफ कैंप पर हमला करने के मामले में एक बंदी जंगबहादुर बरेली सेंट्रल जेल से सोमवार शाम सवा सात बजे रिहा कर दिया गया। परिवार के कुछ लोग और वकील आकर उसे साथ ले गए। वहीं, मोहम्मद शरीफ की रिहाई जुर्माने की वजह से टल गई है।
जेलर नीरज कुमार ने बताया कि सीआरपीएफ कांड में मुरादाबाद के मूढ़ापांडे निवासी जंगबहादुर व रामपुर निवासी मोहम्मद शरीफ कई साल से बरेली सेंट्रल जेल में बंद थे। इस दौरान दोनों को रिहा करने का आदेश जारी किया गया। तीन दिन पहले जेल प्रशासन को ई-मेल पर दोनों के रिहाई परवाना मिले थे। तब विधिक तरीके से परवाना भेजने का अनुरोध किया गया था। अब सोमवार शाम विधिवत रिहाई परवाना आने पर जेल प्रशासन ने जंगबहादुर की रिहाई कर दी। परिजनों के साथ उनके वकील आए थे, जिन्होंने वरिष्ठ जेल अधीक्षक अविनाश गौतम से मुलाकात कर औपचारिकताएं पूरी कराईं।
जेल प्रशासन के मुताबिक शरीफ की भी रिहाई होनी है लेकिन एक पेच फंस गया है। उस पर बीस हजार रुपये का जुर्माना है जो रामपुर कोर्ट में जमा होना है। बरेली सेंट्रल जेल का स्टाफ शरीफ के रिहाई संबंधी कागजात लेकर रामपुर गए थे, लेकिन वहां कोर्ट ने बिना जुर्माना जमा किए रिहाई पर रोक लगा दी। जेलर नीरज कुमार ने बताया कि जुर्माना की औपचारिकता पूरी होने पर शरीफ की भी रिहाई कर दी जाएगी।