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पौधरोपण की हकीकत: चार साल में रोपे गए 1.5 करोड़ पौधे, बरेली जिले में सिर्फ एक फीसदी बढ़ा वन क्षेत्र

Mon, 13 Jul 2026 03:17 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली जिले में चार वर्षों में 1.5 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए, लेकिन वन क्षेत्र में केवल एक फीसदी की वृद्धि हुई। सही से देखभाल न होने के कारण ज्यादातर पौधे सूख गए। 
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टूटा पड़ा ट्री गार्ड - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बरेली जिले में हर साल मानसून के दौरान पौधरोपण अभियान चलाया जाता है। बीते चार वर्षों में जिले में 1.5 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का दावा प्रशासन की ओर से किया जाता है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले साल भी 42 लाख से अधिक पौधे रोपे गए थे। इन सारे प्रयासों के बावजूद जिले के वन क्षेत्र में महज एक फीसदी की वृद्धि हो सकी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पौधे लगाने में जितनी दिलचस्पी दिखाई गई, उनकी देखभाल पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। सरकारी अमला औपचारिकता निभाता रहा और पौधे मुरझाते रहे।

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आंकड़ों के इस खेल की हकीकत मंझा ग्राम्य वन में साफ देखी जा सकती है। कीर्तिमान स्थापित करने के लिए यहां हजारों पौधे रोपे गए थे, लेकिन उनमें से सिर्फ आधे ही जीवित बचे हैं। दूसरी जगहों से जिन पेड़ों को मंझा में ट्रांसलोकेट किया गया था, उनमें से भी एक तिहाई सूख चुके हैं।

इसकी मुख्य वजह विभागों के पास संसाधनों की कमी है। वन विभाग के पास जरूरी संसाधन होते हैं। इस वजह से उनके लगाए 65 से 70 फीसदी पौधे बच जाते हैं। इसके विपरीत, पौधरोपण अभियान में शामिल 27 अन्य विभागों के पास पौधों की सुरक्षा और सिंचाई के लिए संसाधन नहीं हैं। नतीजा, इनके लगाए 15-20 फीसदी पौधे ही जीवित बचते हैं।

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बांस का रकबा हुआ शून्य
बरेली की पहचान बांस बरेली के नाम से भी होती है। ब्रिटिशकाल के बाद भी बरेली में बांस की कई प्रजातियां पाई जाती थीं। यहां बांस के फर्नीचर का बड़ा काम था, लेकिन अब बरेली में बांस का रकबा लगभग शून्य हो गया है। सीबीगंज में वन विभाग के आरबोरेटम और आंवला क्षेत्र के अलावा अन्य स्थानों पर बांस की खेती ही नहीं होती। आरबोरेटम में बांस की कई दुर्लभ प्रजातियों के पौधे उपलब्ध हैं।

विकास के नाम पर काटे 75 हजार पेड़, मिर्जापुर, नजीबाबाद, सिद्धार्थनगर में रोपे पौधे
तीन साल में जिले में विकास के नाम पर 75 हजार से ज्यादा पेड़ों पर आरी चल चुकी है। बरेली-मथुरा, बरेली-पीलीभीत हाईवे और लाल फाटक-रामगंगा के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए काटे गए पेड़ों के बदले पौधरोपण मिर्जापुर, नजीबाबाद व सिद्धार्थनगर में किया गया। दरअसल, जिले में वन विभाग के पास पौधरोपण के लिए भूमि ही नहीं है। प्रमुख वन क्षेत्रों की बात करें तो सीबीगंज, फरीदपुर, आंवला और कुछ मीरगंज में है। शहरीकरण के कारण वन क्षेत्र लगातार सिमट रहा है।
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वर्षवार रोपे गए पौधे
साल       लक्ष्य
2022  38.66 लाख
2023  42.73 लाख
2024  42.72 लाख
2025  42 लाख
2026  36 लाख

धोपेश्वरनाथ मंदिर के पास मुहिम फेल, जमीन फिर हुई बंजर
कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर के पास वन विभाग की मुहिम फेल हो गई है। वर्ष 2020 से पहले विभाग की ओर से इस क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधे लगाए गए थे। पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेड़बंदी भी की गई थी और चारों तरफ सीमेंट के मजबूत खंभे भी लगाए गए थे। इसके बावजूद यहां गिने-चुने पौधे ही बचे हैं, जो पेड़ बनने की ओर अग्रसर हैं। बाकी जमीन बंजर होने की ओर अग्रसर है। वहां पेड़ों की जगह ज्यादातर उनको लगाने के लिए खोदे गए गड्ढे ही नजर आ रहे हैं।
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