बरेली। रामनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बराथानपुर की रीता देवी को हाईकोर्ट के आदेश पर छह महीने बाद फिर से प्रधानी मिल गई है। जांच में वित्तीय अनियमितता मिलने पर डीएम ने 30 मई को इनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित कर दिए थे। अब हाईकोर्ट के आदेश पर इनको फिर से दो दिसंबर को प्रधान पद के दायित्व सौंप दिए हैं।
रीता के विरुद्ध गांव के राजेश, नेत्रपाल, जगत सिंह उर्फ जगदीश, सुखवीर ने शपथ पत्र देकर डीएम से ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की थी। डीएम ने जिला ग्रामोद्योग अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। इन्होंने कार्रवाई के लिए डीएम को 16 अप्रैल को जांच रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राम पंचायत में गंभीर प्रकृति की वित्तीय अनियमितता और गबन मिला था। जिस पर डीएम ने प्रधान रीता देवी को दोषी पाते हुए वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित कर प्रधान के दायित्वों के संचालन के लिए ग्राम पंचायत में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी। साथ ही अंतिम जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी में उप निदेशक कृषि व पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता निर्माण खंड-एक को नामित किया था।
इसी बीच आरोपी प्रधान रीता ने हाईकोर्ट में डीएम के आदेश को चुनौती दी। दायर रिट याचिका पर न्यायालय ने 13 नवंबर को फैसला रीता देवी के पक्ष में सुनाया। जिसके अनुपालन में डीएम ने दो दिसंबर को यह कहते हुए रीता देवी बहाल कर दिया कि पूर्व में 30 मई को जिला मजिस्ट्रेट स्तर से जारी आदेश को हाईकोर्ट ने अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया है और रीता देवी को ग्राम पंचायत बराथानपुर को प्रधान पद पर बहाल किया जाता है। पूर्व में गठित की गई तीन सदस्यीय समिति के संचालन पर रोक लगा दी है।