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Bareilly News: मंडलायुक्त के जांच के आदेश पर बीडीए ने खुद को दी क्लीन चिट

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बरेली। मुड़िया अहमदनगर गांव स्थित सहारा सिटी की जमीन के मामले में मंडलायुक्त साैम्या अग्रवाल के जांच के आदेश पर बीडीए ने खुद को क्लीन चिट दी है। बीडीए ने कहा है कि ले-आउट जारी करने में किसी किस्म की अनियमितता नहीं बरती गई है। हालांकि जांच का निष्कर्ष सामने आने तक बीडीए द्वारा जारी ले-आउट स्थगित रहेगा। उधर, मंडलायुक्त के आदेश पर अपर आयुक्त प्रशासन प्रीति जायसवाल ने जांच शुरू कर दी है।
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मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल को शिकायत मिली थी कि मुड़िया अहमदनगर गांव में सहारा सिटी की जमीन पर महायोजना-2021 के तहत 35 एकड़ का पार्क बनाया जाना था। किन्हीं कारणों से नई महायोजना तैयार कर ग्रीन बेल्ट को उस स्थान से 500 मीटर उत्तर की ओर बढ़ा दिया गया। फिर, एयरपोर्ट से एनओसी लिए बगैर ले-आउट पास कर दिया गया।


उधर, बीडीए के अनुसार, ले-आउट के लिए आवेदन सहारा सिटी ने नहीं बल्कि रघुकुल इंफ्रा लिमिटेड ने किया था। बीते 24 जून को रघुकुल इंफ्रा लिमिटेड के आवेदन पर करीब 10 हेक्टेयर जमीन पर टाउनशिप के लिए ले-आउट स्वीकृत किया गया था। वहीं, रघुकुल इंफ्रा लिमिटेड के डायरेक्टर अमित कुमार ने बताया कि उन्होंने सहारा से करीब एक साल पहले जमीन खरीदी थी और भुगतान सेबी को किया था। ब्यूरो
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आरोपों पर बीडीए के तर्क

- मंडलायुक्त को मिली शिकायत में पहला आरोप यह है कि टाउनशिप की मंजूरी के लिए ग्रीन बेल्ट से छेड़छाड़ की गई। बीडीए का कहना है कि प्रस्तावित टाउनशिप का ग्रीन बेल्ट से कोई मतलब नहीं है। कारण कि प्रस्तावित टाउनशिप की जमीन दोनों महायोजना 2021 और 2031 में आवासीय प्रयोजन के लिए आरक्षित है।
- दूसरा आरोप है कि एयरफोर्स की एनओसी के बिना ले-आउट पास किया गया। बीडीए का कहना है कि एयरफोर्स स्टेशन से 900 मीटर तक एनओसी जरूरी है। स्वीकृत ले-आउट उस परिधि से बाहर है।
- तीसरा आरोप है कि पर्यावरण विभाग की एनओसी नहीं ली गई। बीडीए का कहना है कि एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट नोटिफिकेशन-2006 के प्रावधान लागू हैं। उसके मुताबिक, 50 हेक्टेयर से अधिक की टाउनशिप के ले-आउट के लिए पर्यावरण की एनओसी जरूरी होती है।

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ले-आउट स्वीकृत करने में किसी भी किस्म की अनियमितता नहीं बरती गई है। हम जांच में पूरा सहयोग करेंगे। मंडलायुक्त का जो भी निर्देश होगा, उसका पालन किया जाएगा।
- डॉ. मनिकंडन ए, उपाध्यक्ष, बीडीए







शिकायत के आधार पर जांच कर सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश अपर आयुक्त प्रशासन को दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रकरण में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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- सौम्या अग्रवाल, मंडलायुक्त
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