रविवार को मौलाना ने कहा कि इस्लाम में शादी के कुछ नियम तय किए गए हैं। पहला नियम यह है कि लड़का और लड़की दोनों का मुसलमान होना जरूरी है। यदि दोनों में से कोई एक मुसलमान नहीं है, तो वह शादी जायज नहीं मानी जा सकती। उन्होंने बताया कि उमर अब्दुल्ला मुसलमान हैं। निधि राजदान गैर-मुस्लिम महिला हैं। इन दोनों ने आपस में विवाह कर लिया है। मौलाना रजवी के अनुसार, ऐसी सूरत-ए-हाल में यह शादी इस्लाम की नजर में नाजायज है।
विवाह की वैधता पर सवाल
मौलाना रजवी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में विवाह के लिए दोनों पक्षों का मुस्लिम होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला को पहले निधि राजदान को इस्लाम कबूल करवाना चाहिए था। ऐसा करने पर ही यह शादी जायज मानी जाती। चूंकि यह शर्त पूरी नहीं हुई। इसलिए इस्लाम के सिद्धांतों के अनुसार यह विवाह नाजायज है।