बरेली। रोडवेज के पुराने बस अड्डे का बुरा हाल है। आलम यह है कि बस अड्डे का सर्कुलेटिंग एरिया उखड़ा पड़ा है। जगह-जगह कूड़े के ढेरों से धुआं उठता रहता है। टिनशेड में यात्रियों के बैठने के लिए जो बेंचें लगाई गई हैं उनमें ज्यादातर टूट चुकी हैं। यहां 15 साल में यात्रियों और बसों का आवागमन तो दोगुना हो गया है, लेकिन यात्री सुविधाएं जस की तस हैं। अधिकारी सुधार के लिए प्रस्ताव भेजते हैं, लेकिन यह मुख्यालय स्तर पर लटक जाते हैं।
पुराना रोडवेज बस अड्डे पर रोजाना औसतन 15-17 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। यहां से आगरा, मथुरा, जयपुर, हल्द्वानी, मुरादाबाद, दिल्ली, कासगंज, एटा, बदायूं आदि जिलों के लिए बसों का संचालन किया जाता है। 15 साल पहले यहां यात्री सुविधाओं के विकास के लिए कुछ काम हुए थे। उस समय यात्रियों का आवागमन सात-आठ हजार था।
अब आवागमन दोगुना होने के बाद भी यात्री सुविधाओं को लेकर कोई काम नहीं किया गया है। कहने को तो यात्रियों को पीने के लिए चार प्याऊ लगे हैं। इनमें दो सामाजिक संस्थाओं ने लगवाए हैं। सामाजिक संस्थाओं के लगवाए प्याऊ खराब होने के बाद रोडवेज ने इनको ठीक कराने की जरूरत नहीं समझी।
सर्कुलेटिंग एरिया उखड़ा होने के कारण अक्सर यात्री ठोकर लगने से गिरकर चोटिल हो जाते हैं। परिसर में कैंटीन की सेवा को भी अधिकारियों ने खत्म कर दिया है। ऐसे में यात्रियों को बाहर की दुकानों से खाने-पीने का सामन खरीदना होता है।
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अधिकारियों के दौरे, आदेशों और दावों से आगे कोई कार्रवाई नहीं
सुविधाओं में सुधार के लिए रोडवेज मुख्यालय ने बरेली परिक्षेत्र में नोडल अधिकारी की तैनाती की है। नोडल अधिकारी हर दो माह में दौरा कर जायजा लेते हैं। अधीनस्थों को निर्देश देते हैं और बेहतरी के दावे करते हैं, लेकिन इसके आगे कार्रवाई बढ़ती नहीं दिखती। यहां शौचालय तो है, लेकिन यह भी दुर्दशा का शिकार है।
वर्जन-
सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है। मुख्यालय स्तर से पत्राचार चल रहा है। आने वाले दिनों में काफी सुधार देखने के लिए मिलेगा।- संजीव श्रीवास्तव, एआरएम