बरेली। शरीर में कहीं भी खुली चोट लगने पर उसे पौधे के बीजों से बने मरहम से ठीक किया जा सकेगा। यह सूजन और दर्द कम करने के साथ घाव को जल्द भरेगा।
वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी राजकीय महिला महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. विकास पटेल ने मरहम का अंतरराष्ट्रीय यूटिलिटी जर्मन पेटेंट कराया है। वह बताते हैं कि मरहम को तैयार करने में जंगली पौधे कुचिला (स्ट्राइक्नोस नक्स-वोमिका एल) के बीजों का इस्तेमाल किया गया है।
इस हर्बल मरहम के निर्माण की विधि को मान्यता मिल चुकी है। कुचिला में मुख्य रूप से एंटीऑक्सीडेंट और घाव भरने वाली क्षमताएं होती हैं। पौधे की पत्तियां और जड़ें विशेष यौगिकों से भरपूर होती हैं।
कोशिकाएं बनाने में मददगार
यह पौधा त्वचा की कोशिकाओं के दोबारा उत्पादन की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करता है। इस पौधे के विभिन्न भागों से अब तक 90 से अधिक रासायनिक यौगिक अलग किए जा चुके हैं। वहीं, कुछ सक्रिय यौगिक विभिन्न औषधीय प्रभाव प्रदर्शित करते हैं जैसे कि कैंसर रोधी, एनाल्जेसिक, सूजन रोधी, रोगाणुरोधी, एंटीऑक्सीडेंट, न्यूरोप्रोटेक्टिव, हेपेटोप्रोटेक्टिव, अवसाद रोधी इसमें शामिल हैं। स्ट्राइकिन और ब्रुसीन सक्रिय तत्व हैं जो चिकित्सीय क्षमता और विषाक्तता के लिए जिम्मेदार हैं।
विषैले पौधे के रूप में किया वर्गीकृत
डॉ. विकास के अनुसार नक्स वोमिका को संभावित रूप से विषैले पौधे के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ऐसे में उचित और मान्य विषहरण तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके विषैले प्रभावों को कम करने के लिए अधिक ध्यान देने की जरूरत है। संवाद