बरेली। संजयनगर निवासी 40 वर्षीय महिला स्वास्थ्यकर्मी को ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। उन्होंने देरी किए बिना विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क किया। ऑपरेशन के बाद थेरेपी शुरू हुई। अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। प्लास्टिक सर्जरी से ऑपरेशन के निशान भी अब नहीं बचे।
दूसरी ओर, सुभाषनगर निवासी एक महिला के स्तन में गांठ थी। कई दिन तक उन्होंने इसे किसी से बताया नहीं। तकलीफ बढ़ने पर एक विशेषज्ञ के पास पहुंची तब स्तन कैंसर का पता चला। उन्होंने इलाज से इंकार कर दिया। कैंसर शरीर में फैलता रहा। तकलीफ बढ़ी तब परिजनों को इस रोग का पता चला। अस्पताल लेकर पहुंचे पर तब तक देर हो चुकी थी। उन्हें बचाया नहीं जा सका।
चिकित्सक का कहना है कि जब स्तन में गांठ का अहसास हुआ तभी अगर महिला इलाज को पहुंचती तो जान बच सकती थी। इसलिए स्तन कैंसर है तो इलाज में देरी न करें। यह अब लाइलाज नहीं रहा। समय पर जानकारी मिल जाए तो इलाज से निजात मिलने की संभावना है।
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रगति अग्रवाल के मुताबिक जो महिलाएं स्तन में गांठ की समस्या बताती हैं, उन्हें तत्काल संबंधित जांच का सुझाव देते हैं। ताकि देर न हो।
लक्षण और कारण
स्तन या बगल में दर्द होना, दर्द रहित गांठ, त्वचा का लाल होना, स्तन के आकार में बदलाव होना, निप्पल का उल्टा होना, जलन या सिकुड़न के शुरुआती लक्षण हैं। मासिक धर्म में परिवर्तन, नशीले पदार्थ का सेवन, परिवार में ब्रेस्ट कैंसर के मरीज होना या हार्मोनल बदलाव और नवजात को दूध न पिलाने वाली महिला को ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। इलाज में ऑपरेशन के साथ थेरेपी होती है।
17 वर्ष में पांच हजार स्तन कैंसर के आए मरीज
निजी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. पियूष कुमार के मुताबिक बीते 17 वर्षों में इलाज के लिए करीब पांच हजार स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाएं इलाज के लिए पहुंची। जिन्होंने परामर्श अनुसार इलाज कराया वे सभी सुरक्षित हैं। बताया कि प्रत्येक शनिवार को कॉलेज में ब्रेस्ट स्क्रीनिंग होती है। क्योंकि स्तन में कई वजह से गांठ होती है। वह कैंसर है या नहीं इसका पता स्क्रीनिंग से ही चलता है।
अमर उजाला ब्यूरो