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गन्ने की नर्सरी से महिलाओं ने दरवाजे पर पाया रोजगार

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बरेली। कोरोना काल में जिले की महिलाओं ने स्वावलंबन की नई मिसाल पेश की है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने घरों के दरवाजे पर ही एक साल में गन्ने की 30 लाख पौध तैयार करके एक करोड़ से ज्यादा की आय अर्जित की है। महिलाएं गन्ना विभाग की मदद से सिंगल बड और बड चिप की मदद से गन्ने की नर्सरी तैयार कर रही हैं।
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महिलाओं द्वारा तैयार गन्ना की पौध की किसानों के बीच खूब मांग है। किसान घरों से ही पौध खरीद कर ले जाते हैं। महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए गन्ना विभाग की ओर से अनुदान भी उपलब्ध कराया जाता है। जिले में 74 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब तक 30.88 लाख पौध तैयार कर चुकी हैं। पौध पर गन्ना विभाग की ओर से इन महिलाओं को 46.32 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। किसान प्रति पौध दो रुपये में खरीदते हैं। इस तरह महिलाएं अब तक 1.08 करोड़ रुपये की कमाई कर चुकी हैं। जिले में 74 समूहों से जुड़ी 745 महिलाएं गन्ने की पौध तैयार करने का काम कर रही हैं। कोरोना काल में रोजगार के संकट के बीच ये महिलाएं घर के दरवाजे पर ही पौध तैयार करके कमाई करती रहीं। बरेली के अलावा शाहजहांपुर में एक हजार, पीलीभीत में सबसे ज्यादा तीन हजार और बदायूं में सबसे कम 184 महिलाएं पौध तैयार कर रही हैं।
मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं सम्मानित
गन्ने की पौध तैयार कर रहीं बरेली की महिलाएं प्रदेश में अपना नाम रोशन कर चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रदेश की आठ महिलाओं के साथ बरेली की कुसुम को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया था। नवाबगंज तहसील के गांव गुरसौली की रहने वाली कुसुम गन्ने की पौध तैयार करती हैं। कुसुम ने अपने समूह से आसपास की कई महिलाओं को जोड़कर उन्हें रोजगार का अवसर दिया है। कुसुम की इस उपलब्धि की सराहना मुख्यमंत्री ने भी की थी।
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कम बीज से दोगुनी होगी पैदावार
बड चिप प्रकिया में एक गन्ने से औसतन 18 से 22 पौधे तैयार होते हैं। इस विधि से गन्ने के बीज की करीब 75 प्रतिशत तक की बचत होती है। नर्सरी की रोपाई से गन्ने की पैदावार में भी वृद्घि होती है। सीधे बोआई करने की तुलना में नर्सरी लगाने पर किसानों का खर्च भी कम आता है। इस वजह से किसान भी इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
गन्ना की नर्सरी तैयार करने में बरेली प्रदेश के शीर्ष जिलों में शामिल है। यहां 745 महिलाएं नर्सरी तैयार करने के काम से जुड़कर अच्छी कमाई कर रही हैं। किसानों के बीच भी नर्सरी लगाने का चलन बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में और महिलाओं को इससे जोड़ा जाएगा। - पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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