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शहर के श्मशान से परहेज, गांव के श्मशान में बढ़ी शवों की संख्या

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गिरधारीपुर के लोग बोले- प्रधान जी, श्मशान के गेट में डाल दो ताला

बरेली। कोरोना संक्रमित लोगों का बड़े पैमाने पर अंतिम संस्कार होने से शहर के बड़े श्मशानों का बुरा हाल है। ऐसे में कई लोग शव गांवों के छोटे श्मशानों में ले जा रहे हैं। स्थिति यह है कि अब गांवों के लोग इस पर आपत्ति जताने लगे हैं कि उनके यहां बाहर के शव क्यों लाए जा रहे हैं। गिरधारीपुर के लोगों ने प्रधान से शिकायत की है कि बाहरी शवों पर बंदिश के लिए श्मशान में ताला डलवा दिया जाए।
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करीब पंद्रह दिन से शहर में लोगों की मौत का आंवड़ा बेहिसाब बढ़ गया है। सिटी श्मशान घाट और संजय नगर श्मशान घाट पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में अंत्येष्टि हो रही हैं। दोनों श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने के लिए जगह कम पड़ रही है। वहीं संक्रमित शव लेकर आने वाले लोगों से कोरोना संक्रमण का खतरा बना रहता है। ऐसे में लोग शहर के आसपास दूसरी जगहों पर बने श्मशान घाट में शव ले जाने पर मजबूर हैं। इज्जतनगर के गिरधारीपुर में स्थित श्मशान घाट में भी इन दिनों कई शव लाए जा रहे हैं। लोग यहां बिना चबूतरे के नीचे ही अंतिम संस्कार करने पर मजबूर हैं। कई लोग अंतिम संस्कार करने के बाद अस्थियां तत्काल ले जाते हैं तो कई लोग अस्थियां ले ही नहीं गए हैं। पूरा श्मशान घाट भर चुका है। अब गांव वालों ने प्रधान से बाहरी शवों के अंतिम संस्कार करने पर रोक लगाने की मांग की है। कहा है कि वहां ताला डाल दिया जाए। कोई कर्मचारी तैनात न होने के कारण शवों का विवरण भी नहीं रखा जा रहा है।
‘हमारे गांव के श्मशान घाट में दूसरी जगहों से लोग अंतिम संस्कार करने आ रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने श्मशान घाट में ताला लगाने की मांग की थी लेकिन लोगों की मजबूरी को ध्यान में रखते हुए श्मशान में ताला नहीं लगाया गया। नगर निगम से बात कर शमशान घाट पर एक कर्मचारी तैनात कराएंगे, ताकि शवों का विवरण रखा जा सके।’ - वीरू राजपूत, गिरधारीपुर की प्रधान कमलेश के पति
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