शहर के पैथालॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटरों से मरीजों का भरोसा ऐसे ही नहीं उठ गया है। अधिकतर पैथालॉजी सेंटर तो ऐसे हैं जहां पैथालॉजिस्ट ही नहीं बैठते। दिन भर होने वाली जांचों की लैब टैक्नीशियन ही रिपोर्ट बना देते हैं, शाम को आकर डॉक्टर भी हस्ताक्षर करके अपना कमीशन लेकर निकल लेते हैं। शहर के कई पैथालॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटरों का निरीक्षण यह खुलासा कुछ समय पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया था। इस टीम ने पैथालॉजी सेंटरों पर डॉक्टर की जगह लैब टैक्नीशियन को जांच रिपोर्ट बनाते हुए पाया था। जिला अस्पताल में आने वाली ऐसी तमाम जांच रिपोर्ट रोजाना फेल कर दी जाती हैं। जाहिर है कि जो लोग इन पैथालॉजी सेंटरों की रिपोर्ट को क्रॉस चेक नहीं कराते, वे ऐसी बीमारियों का इलाज कराते रहते हैं जो उन्हें होती ही नहीं। कमीशन का यह खेल इतना विकराल है जिसमें मरीजों की जिंदगी की भी परवाह नहीं की जाती। एक-एक जांच में 50 फीसदी का सीधा कमीशन डॉक्टरों का होता है। बता दें कि जिले में 65 पैथालॉजी सेंटर पंजीकृत हैं। औसतन एक सेंटर पर रोजाना 50 से 80 मरीज जांच को पहुंचते हैं।
बिना डॉक्टरी सलाह के जांचें सस्ती
शहर के पैथालॉजी सेंटर में शुगर की जांच कराएं या फिर थायराइड की। इनके दो दाम हैं। अगर आप खुद से ब्लड शुगर की जांच कराने जाएंगे तो सिर्फ 40 रुपये ही खर्च होंगे, जबकि किसी डॉक्टर के पर्चे पर लिखी जांच करवाएंगे तो आपको 80 से 100 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। मतलब साफ है कि हर जांच में कमीशन की रकम इतनी होती है कि जांच के दाम तक दोगुने हो जाते हैं और इसकी भरपाई मरीज को करनी पड़ती है।
सिर्फ स्कैन किए हस्ताक्षर से चल रहा है काम
पड़ताल के दौरान बात सामने आई कि कई पैथालॉजी सेंटर पर सिर्फ स्कैन किए हस्ताक्षर से रिपोर्ट दी जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 65 पैथालॉजी सेंटर पर दो डॉक्टराें को छोड़कर बाकी सभी पैथालॉजिस्ट एक-एक जगह संबद्ध हैं जबकि एक डॉक्टर एक-दो नहीं पूरे सात सेंटर और एक डॉक्टर दो सेंटरों पर अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में यह बताने की जरूरत नहीं कि जांच करने और रिपोर्ट तैयार करने में वे कितना समय दे पाते होंगे। शहर के बड़े-बड़े सेंटरों पर भी डॉक्टरों के स्कैन हस्ताक्षर से ही काम चलाया जा रहा है।
इस तरह होता है खेल
पैथालॉजी की जांच के लिए अब तो डॉक्टर के पास ही सेंटर के प्रतिनिधि बैठे रहते हैं। जैसे ही कोई मरीज आता है, तुरंत सैंपल लेकर भेज दिया जाता है। ऐसे में मरीजों को फीस का पता ही नहीं चलता है। अधिकतर सेंटराें के बाहर जांच की रेट लिस्ट तक नहीं लगी होती है। अगर आपने बिना डॉक्टर के सलाह पर जांच कराई है तो उसकी रसीद नहीं दी जाएगी। एक्सरे में सबसे अधिक मार्जिन कमाया जाता है। एक एक्सरे की फिल्म मात्र 40 रुपये की आती है और जांच का खर्च 100 से 150 रुपये आता है, लेकिन बाजार में यह 300 रुपये में होता है। सीटी स्कैन और एमआरआई ने डॉक्टरों की चांदी कर दी है। इसमें 50 फीसदी कमीशन सीधे डॉक्टरों का है।
जानिए कितना ठगे जाते हैं आप
जांच वास्तविक फीस कमीशन के बाद
ब्लड शुगर 40 80
हीमोग्लोबिन 50 100
थायरॉयड 400 700
अल्ट्रासाउंड 350 600
क्रेटनिन 530 880
लिपिड प्रोफाइल 530 850
यूरिक एसिड 70 120
सीटी स्कैन 2650 5500
एक्सरे 120 300
पैथालॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटरों में चल रहे खेल को देखते हुए जल्द ही इनको एक नोटिस भेजा जाएगा। डॉक्टरों से पूछा जाएगा कि वे कितना समय सेंटरों को देते हैं और रिपोर्ट कैसे बनाते हैं। रिपोर्ट गड़बड़ होने की कई शिकायतें मिली हैं।
डॉ. अशोक कुमार, जांच टीम के प्रभारी
पिछले दिनों मैंने अपनी मां की थायराइड जांच एक अस्पताल से कराई थी, इसका शुल्क अधिक लिया गया, लेकिन जब वहीं जांच सीधे एक पैथालॉजी सेंटर में कराई तो शुल्क आधा कम था। हालांकि दोनों रिपोर्ट की रसीद नहीं दी गई। इसमें डॉक्टराें के स्कैन हस्ताक्षर थे।
विनय, कारोबारी