बरेली। कोरोना संक्रमण से मृत्युदर में वृद्धि होने से संक्रमित भयभीत हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ भी इस पर चिंता जता चुके हैं। यही वजह है कि अब साधन संपन्न संक्रमित यहां इलाज कराने के बजाय सीधे दिल्ली का रुख कर रहे हैं। संक्रमण की पुष्टि के बाद अब तक 40 से ज्यादा संक्रमित इलाज के लिए दिल्ली जा चुके हैं। इनमें व्यापारी, डॉक्टर, उद्यमी और जनप्रतिनिधि शामिल हैं। दरअसल, यहां दिल्ली जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। लिहाजा, जो समर्थ हैं, वे अनहोनी की आशंका के चलते बेहतर इलाज के लिए दिल्ली जा रहे हैं।
पिछले दिनों संक्रमित मिले प्रदेश के पूर्व वित्तमंत्री को कोविड एल-2 अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन बाद ही सांस लेने में कुछ तकलीफ हुई तो अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें और बेहतर इलाज मुहैया कराने का भरोसा दिलाया, लेकिन परिजन उन्हें दिल्ली ले गए। वहां एक निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया है। बीते दिनों ही एक बड़े कारोबारी के भाई की तबीयत खराब हुई हो तो वह यहां सैंपल की जांच कराने के बजाय दिल्ली चले गए। वहां एक निजी अस्पताल में जांच कराई तो संक्रमण की पुष्टि हुई। इसी तरह एक जनप्रतिनिधि के भाई भी दिल्ली में संक्रमित मिले। उनका वहीं इलाज चल रहा है। करीब पांच दिनों में यहां से पांच निजी चिकित्सक भी संक्रमण की पुष्टि के बाद इलाज के लिए दिल्ली जा चुके हैं। कई व्यवसायी और उनके परिजन भी दिल्ली में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो अब तक करीब 40 व्यक्ति कोविड एल-2 और एल-3 अस्पताल से रेफर होकर दिल्ली जा चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पास हैं सीमित संसाधन
आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद पागरानी के मुताबिक, संक्रमण से बचाव के लिए सभी हर संभव प्रयास करते हैं। संक्रमण से पहले भी गंभीर मरीजों को दिल्ली ही रेफर किया जाता रहा है। कोरोना का कोई इलाज भी नहीं है। ऐसे में हालत बिगड़ने पर तत्काल बेहतर इलाज, दवा आदि की सुविधा मुहैया हो सके इसलिए जो सक्षम हैं वे इलाज के लिए दिल्ली जाना ही बेहतर समझते हैं। सरकारी सिस्टम की ओर से सीमित संसाधनों में ही सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
वेंटिलेटर की है कमी, दवाएं भी सीमित
जानकारों के मुताबिक, जिले में करीब 159 वेंटिलेटर ही उपलब्ध हैं, जबकि संक्रमितों की संख्या पांच सौ के पार पहुंच गई है। सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। यह सिर्फ निजी अस्पतालों में ही है। जब निजी अस्पतालों में ही इलाज पर खर्च करना है तो लोग दिल्ली को चुन रहे हैं। शुरुआत में वेंटिलेटर भी आसानी से मुहैया हो जाते थे, लेकिन अब संक्रमित की तादाद बढ़ने से कहीं वेंटिलेटर मिलने में समस्या न हो, इस आशंका से लोग इलाज के लिए दिल्ली जा रहे हैं।
कैद होने से बचने के लिए जा रहे बाहर
संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि दिल्ली में इलाज की हाईटेक व्यवस्थाएं हैं। वहां कोरोना को लेकर लोगों की सोच भी बदली है। बरेली में संक्रमित मिलने पर व्यक्ति को अपराधी की दृष्टि से देखा जाता है। उसके परिजन और संपर्क में आए लोगों को भी संदेह की दृष्टि से लोग देखते हैं। संक्रमित व्यक्ति समाज में भय का पर्याय बन जाता है। इससे मानसिक तनाव बढ़ता है। इससे बचने के लिए ही लोग इलाज के लिए दिल्ली जा रहे हैं।
संक्रमित और व्यवस्थाएं एक नजर में
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में एक ट्रू-नेट मशीन और आईवीआरआई लैब में सैंपल की जांच की सुविधा है। इसके अलावा दो कारपोरेट लैब में भी सैंपल की जांच की जा रही है। अब एंटीजन किट से भी जांच शुरू हो गई है। संक्रमितों को भर्ती करने के लिए दो कोविड एल-1, दो कोविड एल-2 और एक कोविड एल-3 अस्पताल है, लेकिन इनमें से एल-2 और एल-3 अस्पताल में ही इलाज की सुविधा है। 18 सौ संक्रमित को आइसोलेट करने के लिए बेड उपलब्ध होने का दावा अफसर कर रहे हैं। 86 एंबुलेंस और 157 वेंटिलेटर चालू हालत में हैं। मंगलवार तक के आंकड़ों के मुताबिक, बरेली में 997 पॉजिटिव केस मिल चुके हैं। इनमें 502 एक्टिव हैं, 642 डिस्चार्ज हो चुके हैं और 39 की मौत हो चुकी है।