केंद्र सरकार ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देेने के लिए ‘नील क्रांति’ योजना लागू की है। मत्स्य विभाग में चल रही पुरानी योजनाएं प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बंद मानी जाएंगी। नई योजना में मछली पालन के लिए नया तालाब बनाने के लिए 8.5 लाख के प्रोजेक्ट पर लाभार्थी को 50 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। इतना ही बजट लाभार्थी को खुद खर्च करना होगा।
अब तक मछली पालन के लिए सरकार लाभार्थी को 3.5 लाख रुपये अनुदान देती थी। इसमें सामान्य जाति के लाभार्थी को 20 फीसदी और अनुसूचित जाति के लाभार्थी को 25 प्रतिशत अनुदान मिलता था। ‘नील क्रांति’ योजना में प्रोजेक्ट की लागत बढ़ाकर साढ़े आठ लाख कर दी गई है। अनुदान देने के लिए लाभार्थी की जातिगत सीमा भी समाप्त हो गई है। अब किसी भी जाति का लाभार्थी नया तालाब बनाकर मत्स्य पालन करके अनुदान का फायदा उठा सकता है। अगर लाभार्थी के पास पुराना तालाब है तो उसमें सुधार कर मत्स्य पालन करने पर पांच लाख का अनुदान मिलेगा। इसमें सरकार लाभार्थी को आधी रकम का अनुदान देगी। बरेली में मत्स्य पालन के लिए नई पांच प्रोजेक्ट चयनित किए गए हैं। इनकी लागत 25 लाख है। इनमें 50 हजार से ज्यादा मछली पालन होने के दावे किए जा रहे हैं।
यहां चल रहे मत्स्य पालन के प्रोजेक्ट
मत्स्य जीवी सहकारी समिति हौंसपुर (मीरगंज), मत्स्य जीवी सहकारी समिति भदपुरा, (नवाबगंज) मत्स्य जीवी सहकारी समिति लखनपुर (फरीदपुर), राजबहादुर और बबलू अटापट्टी शिवाली (सदर)
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केंद्र सरकार ने मत्स्य पालन की पुरानी योजनाएं बंद करके ‘नील क्रांति’ योजना लागू की है। इसमें लाभार्थी को प्रोजेक्ट की लागत के साथ अनुदान की राशि भी बढ़ा दी गई है। उम्मीद है कि इससे मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा।
- जीएस गंगवार, कार्यकारी अधिकारी मत्स्य विभाग