बरेली। नए कानूनों को लेकर पुलिसकर्मियों से लेकर जनता तक उहापोह में है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि यह ज्यादा सुविधाजनक और पारदर्शी हैं। अफसरों के मुताबिक अब आरोपियों की गिरफ्तारी ज्यादा पारदर्शी तरीके से की जाएगी। इसकी बीडियोग्राफी करानी होगी। सात साल से ज्यादा सजा के मामलों में गिरफ्तारी के वक्त आरोपी के किसी परिजन या रिश्तेदार के दस्तखत कराने होंगे। कोई नहीं मिला तो संबंधित इलाके का कोई संभ्रांत व्यक्ति गिरफ्तारी की गवाही देगा।
इससे पुलिस अनावश्यक रूप से किसी को ज्यादा समय हिरासत में नहीं रख सकेगी। गिरफ्तारी मेमो में रिश्तेदार का मोबाइल नंबर भी अंकित होगा। आगे किसी कार्रवाई की सूचना भी उसे मेसेज व कॉल से मिलती रहेगी। नए कानून की बारीकियां बताने के लिए संबंधित विभागों में कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। एसएसपी व एसपी यातायात समेत अन्य अधिकारी इसमें नई व्यवस्था के लाभ बता रहे हैं।
मोबाइल चोरी-लूट की रिपोर्ट लिखाना हुआ आसान
अभी तक पुलिस किसी का मोबाइल चोरी या लूट होने पर रिपोर्ट लिखने से इसलिए कतराती थी, क्योंकि इसमें चोरी या लूट की धाराएं लगानी पड़ती थीं। समय रहते खुलासा न होने पर थाना प्रभारी व विवेचक को जवाब देना मुश्किल हो जाता था। इसलिए पुलिस ऐसे मामलों में यह लिखवाकर ले लेती थी कि मोबाइल गिर गया है या खो गया है। अब मोबाइल छिनैती के लिए भारतीय न्याय संहिता में अलग से धारा 304 की व्यवस्था की गई है। अन्य प्रकार की लूट से अलग धारा होने की वजह से इसे दर्ज करने में पुलिस को दिक्कत नहीं होगी। साथ ही मोबाइल फोन बरामद होने पर असली मालिक को आसानी से मिल सकेगा।
शादी का झांसा देकर इन्कार के मामलों के लिए भी अलग धारा
शादी का झांसा देकर संबंध बनाने व इन्कार करने पर अभी तक दुष्कर्म की धारा में रिपोर्ट होती थी। इस तरह के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई धारा 69 लागू की गई है। इस धारा में इसी श्रेणी के अपराध दर्ज किए जाएंगे। दुष्कर्म के अन्य मामलों से अलग श्रेणी में रखकर इनकी विवेचना की जाएगी।
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एप में फीड होगी डॉक्टरी और पोस्टमार्टम की कार्रवाई
सात साल या अधिक सजा के मामले में पीड़ित के मेडिकल परीक्षण या मृतक की पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है। एक एप बनाया गया है। इसमें केस के हिसाब से यह सब वीडियो व मजरूबी चिट्ठी आदि फीड की जाएंगी, जिन्हें विवेचक जरूरत के हिसाब से कोर्ट में प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके लिए अलग से सीडी या पेन ड्राइव की जरूरत नहीं पड़ेगी। विधिक साक्ष्यों के आधार पर गंभीर मामलों में भी अधिकतम तीन महीने में चार्जशीट लगानी पड़ेगी।
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बच्चों से अपराध कराया तो अलग धारा में कार्रवाई
कई मामलों में शातिर पशु तस्करी, चोरी या छिनैती जैसे अपराध में बच्चों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा करके वह खुद कार्रवाई के दायरे से दूर रहते हैं। अब ऐसे मामलों में धारा 95 के तहत दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए अलग से सजा का प्रावधान है।
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फोटो- शिवराज
वादी को मिलती रहेगी हर जानकारी
एसपी यातायात शिवराज ने बताया कि विभिन्न मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराने वाले लोगों को आगे की कार्रवाई का पता नहीं चल पाता था। नए कानून में उनको भी राहत मिलेगी। उनका जो मोबाइल नंबर रिपोर्ट में दर्ज किया जाएगा, उस पर बयान दर्ज कराने से लेकर चार्जशीट व एफआर जैसी हर कार्रवाई का अपडेट मेसेज से मिलेगा।