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Animal Diet Chart : अब हर शेर को महीने में मिलेगा 60 हजार का भोजन, वन्य पशुओं पर शोध के बाद डायट चार्ट तैयार

Sun, 29 May 2022 05:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अजीत प्रताप सिंह, बरेली

सार

आईवीआरआई पशु पोषण विभाग के वैज्ञानिकों ने 34 चिड़ियाघरों के 55 वन्य पशुओं पर किया शोध। आहार में प्रोटीन, कैल्शियम की मिली थी कमी, डायट चार्ट के अनुसार खिलाया आहार तो दिखा सुधार। 
 
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इंदौर के चिड़ियाघर में बैठा एक शेर... - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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देश के चिड़ियाघरों में अंग्रेजों के बनाए डायट चार्ट से वन्य पशुओं की तबीयत बिगड़ रही है। कई सालों तक चले लंबे शोध के बाद पिछले दिनों आईवीआरआई पशु पोषण विभाग के वैज्ञानिकों ने सभी जानवरों का डायट चार्ट तैयार किया है। मुख्यत: शेरों की आहार प्रणाली को केंद्र में रखकर किए शोध में वर्तमान मूल्य के अनुसार एक शेर के प्रतिमाह के आहार पर 60 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है।

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आईवीआरआई पशु पोषण विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. असित दास के मुताबिक अंग्रेजों के बनाया डायट चार्ट असामान्य था। किसी चिड़ियाघर में पशुओं को सामान्य से अधिक तो कहीं बेहद कम भोजन दिए जाने की जानकारी मिली। सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया (जेडसीए) के सहयोग से मानक के अनुरूप सर्वे कार्य शुरू किया गया था। देश के 34 चिड़ियाघरों में पहुंचकर जानवरों को मिल रही डायट आंकी।

पूर्व में मिली जानकारी की पुष्टि होने के बाद उन्हें दिए जाने वाले भोजन के सैंपल लिए। ताकि दिए जा रहे भोजन में मौजूद पोषण तत्वों की जानकारी मिल सके। पहला तो कहीं अधिक और कहीं कम भोजन देने का तथ्य सामने आया। दूसरा, भोजन में संबंधित जानवर के अनुसार या तो अधिक या कम पोषण तत्वों की जानकारी मिली। लिहाजा, स्टैंड डायट चार्ट बनाने की ओर कार्य शुरू किया गया।
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संतुलित आहार न होने से शेरों में बढ़ रहा मोटापा
जंगल में रहने वाले शेर शिकार करके पेट भरते हैं, जबकि चिड़ियाघर के रहने वाले शेरों को बगैर किसी शारीरिक श्रम के मांस मिलता है। जंगल में रहने वाले शेर को कभी कम तो कभी अधिक मांस खाने को मिलता है जबकि चिड़ियाघर के शेर को प्रतिदिन नियमित डायट मिलती है। बिना श्रम के मिल रहे असंतुलित आहार से शेरों में चर्बी बढ़ रही थी। इसकी वजह से अन्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही थीं। ऐसे में चिड़ियाघर के शेरों के लिए चले लंबे शोध के बाद आठ किलो मांस खिलाने का स्टैंड डायट चार्ट तैयार किया गया। पूर्व में करीब 12 से 14 किलो तक मांस प्रतिदिन सेवन के लिए दिया जाता था।

प्रजनन एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता भी हो रही थी कम
डॉ. दास के मुताबिक खानपान अव्यवस्थित होने की वजह से चिड़ियाघर के पशुओं की कई क्षमताओं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा था। उनकी प्रजनन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता, पाचन क्रिया प्रभावित मिलीं। साल 2007 में शुरू हुआ शोध कार्य कई सालों तक लगातार चलता रहा। साल 2013 में ‘स्टैंडर्डाइजेशन ऑफ एनिमल डायट इन इंडियन जू’ नाम से एक कंपेडियम प्रकाशित हुआ। अचानक भोजन की मात्रा में बदलाव नहीं कर सकते थे, इसलिए धीरे-धीरे जानवरों की डायट में परिवर्तन कर निगरानी की जाती रही। करीब आठ साल की निगरानी के बाद सकारात्मक प्रभाव की पुष्टि हुई है।

इन जानवरों का डायट चार्ट तैयार
शेर, चीता, बाघ, तेंदुआ, ब्लैक बक, चिंकारा, गौर, जिराफ, जेब्रा, जंगली सुअर, जंगली गधा, एक सींग वाले गैंडा, हाथी, मालाबार जायंट स्क्विरेल, लंगूर, नीलगिरि लंगूर, हॉर्नबिल, स्नो लेपर्ड, तिब्बतन सियार, सियार, क्लाउडेट लेपर्ड, सिवेट, रेड पांडा, पैराकीट्स, सांबर समेत करीब 55 प्रजाति के जानवरों का डायट चार्ट कई सालों तक चले शोध के बाद तैयार किया गया है। इसे लागू करने के लिए कंपेडियम जारी होने के बाद चिड़ियाघरों को भेज दिया गया। नियमित निगरानी में सार्थक परिणाम मिलने पर डॉ. दास और उनकी टीम को आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने सराहा है।

इन चिड़ियाघरों में किया गया शोध कार्य
कानपुर, लखनऊ, छतबीर, लुधियाना, पटना, गुवाहाटी, ईटानगर, शिलॉन्ग, त्रिपुरा, गंगटोक, बरेली आंवला इफको, मुंबई, अहमदाबाद, जूनागढ़, भुवनेश्वर, ग्वालियर, नैनीताल, इंदौर, सरहन, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, पुणे, जयपुर, जोधपुर, कुफ्री, बंगलौर, मैसूर, तिरुवनंतपुरम, नागपुर, मंगलौर और वन्य प्राणी उद्यान बरेली इज्जतनगर के जानवरों के आहार प्रणाली के संबंध में शोध कार्य किया गया।

किसे कितना मिलना चाहिए मांस
रिपोर्ट के अनुसार टाइगर में नर को आठ किलो, मादा को छह किलो, एशिएटिक लॉयन में नर को 6.75 किलो, मादा को पांच किलो, लेपर्ड और स्नो लेपर्ड में नर को 2.5 किलो, मादा को दो किलो, क्लाउडेट लेपर्ड में नर और मादा को 1.3 से 1.5 किलो चिकन, इसी तरह सभी वन्य प्राणियों के लिए भी खाने की सूची लिस्ट तैयार की गई है। 

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