प्रबंधन ने 2500 कर्मियों का जमा नहीं किया था ईपीएफ अंश, 1.32 करोड़ से बढ़कर पांच गुना धनराशि
बरेली। रबर फैक्टरी प्रकरण पर बॉम्बे हाईकोर्ट में शीतकालीन सत्र खत्म होने के बाद सुनवाई शुरू होते ही केंद्रीय श्रम मंत्रालय सक्रिय हो गया है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने फैक्टरी प्रबंधन से छह करोड़ रुपये से ज्यादा ईपीएफ की रकम की वसूली के लिए रबर फैक्टरी की संपत्ति पर दावेदारी कर रही कंपनी अलकेमिस्ट और लिक्विडेटर को नोटिस जारी किया है। हालांकि अलकेमिस्ट ने ईपीएफ की अदायगी कर पाने में हाथ खड़े कर दिए हैं। नोटिस के जवाब में उसने कहा है कि अभी उसके पास कोई धनराशि नहीं है न उसे अभी फैक्टरी की संपत्तियों पर कब्जा मिला है।
रबर फैक्टरी प्रकरण पर सुनवाई कर रहे बॉम्बे हाईकोर्ट में सरकार, प्रशासन और दूसरे पक्षों को 30 जनवरी तक अपने-अपने दावे पेश करने हैं। इसीलिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने रबर फैक्टरी प्रबंधन से करीब 6.10 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के लिए अलकेमिस्ट एसेस्ट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी से बकाया धनराशि की वसूली करने को पिछले दिनों नोटिस जारी कर दिया। हालांकि अलकेमिस्ट की ओर से नोटिस के जवाब में साफ किया गया है कि वह फिलहाल बकाया धनराशि जमा करने की स्थिति में नहीं है। कंपनी का कहना है कि अभी उसे फैक्टरी की जमीन और संपत्तियों पर कब्जा नहीं मिला है, इसलिए उस पर देनदारी ही नहीं बनती है। ईपीएफओ ने अलकेमिस्ट के साथ रबर फैैक्टरी लिक्विडेटर को भी बकाया की अदायगी के लिए नोटिस जारी किया है। उधर, केंद्रीय श्रम मंत्रालय इस मामले में नरमी बरतने को तैयार नहीं है। इसी कारण मुंबई के कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय को भी इस प्रकरण की निगरानी का निर्देश दिया गया है।
ईपीएफओ बॉम्बे हाईकोर्ट में करेगा दावा
रबर फैक्टरी प्रबंधन ने अक्तूबर 1998 से अगस्त 1999 तक करीब 25 सौ कर्मचारियों के ईपीएफ की रकम जमा नहीं की, इसके बावजूद कि इस अवधि में फैक्टरी चल रही थी। उस समय यह बकाया करीब 1.32 करोड़ रुपये का था जो अब क्षतिपूर्ति और ब्याज मिलाकर 6.10 करोड़ रुपये हो चुका है। सूत्रों ने बताया कि ईपीएफओ बकाया वसूली करने के लिए हाईकोर्ट में पक्षकार बनेगा।
सीएम से बार-बार शिकायत की तब जागे शासन के अफसर
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 अक्तूबर को रबर फैक्टरी के रिसीवर को फैक्टरी की जमीन और संपत्तियों पर अलकेमिस्ट को कब्जा देने का आदेश दिया था। इससे पहले शासन रबर फैक्टरी की जमीन को राज्य सरकार के स्वामित्व में लेने के लिए पैरवी का आदेश दे चुका था पर अफसरों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार की ओर से कई बाद इस मामले में मुख्यमंत्री को आगाह किया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास विभाग के विशेष सचिव मुथुकुमार सामी को नोडल अफसर बनाया मगर उन्होंने भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस बीच मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने रबर फैक्टरी की भूमि की नापजोख कराकर रिपोर्ट जरूर शासन को भेज दी। पिछले महीने किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री के सामने जनप्रतिनिधियों ने फिर मामला उठाया तो शासन ने हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश दुबे पाटिल को नामित किया जिन्होंने पांच जनवरी को याचिका दाखिल की तो हाईकोर्ट ने रबर फैक्टरी पर अलकेमिस्ट को कब्जा देने के आदेश पर रोक लगाते हुए सभी पक्षों को 30 जनवरी तक दावा प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इस मामले में अब 23 फरवरी को सुनवाई होनी है।
रबर फैक्टरी प्रबंधन ने कर्मचारी भविष्य निधि खाते में धनराशि जमा नहीं की थी जो उस पर बकाया है। ईपीएफओ के अधिकारी इसकी वसूली के लिए कार्रवाई कर रहे हैं। फैक्टरी की जमीन और संपत्ति पर सरकार का पुनर्प्रवेश और स्वामित्व लेने प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। -संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री