जीवन भर बैंक में नौकरी की कभी खुले पैसे और नोट की कमी नहीं रही लेकिन छोटे नोट न होने की वजह से एक पूर्व बैंक प्रबंधक की अंत्येष्टि में दिक्कत आई। घरवालों के पास पांच सौ हजार के नोट निकले तो अंतिम संस्कार का सामान नहीं जुटा पाए। बात जब उनके पुराने आफि इलाहाबाद बैंक पहुंची तो वहां के कर्मचारियों ने सौ-सौ रुपये जुटाकर दिया तब कहीं अंतिम संस्कार का इंतजाम हो सका।
किला स्थित मदारी दरवाजा पर रहने वाले इलाहाबाद बैंक के 90 वर्षीय पूर्व बैंक प्रबंधक रामरतन टंडन की शनिवार सुबह मौत हो र्गई। उनके परिवार वाले उनके अंतिम संस्कार का इंतजाम करने लगे लेकिन न तो कोई सामान मिला और न ही श्मशान घाट पर लकड़ी की व्यवस्था हो पाई। इसकी जानकारी उनके परिजनों ने इलाहाबाद बैंक शहामतगंज शाखा के कर्मचारियों को दी। उन्हाेंने मिलकर सौ-सौ के नोटों के करीब 10 हजार रुपये परिजनों को उपलब्ध कराया। दोपहर बाद उनका अंतिम संस्कार हो सका। रामरतन इलाहाबाद बैंक से ही रिटायर हुए थे।