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नोट बंदी से जरी कारोबार पर दोहरी मार

Mon, 28 Nov 2016 12:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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Note captive released by a double whammy on business - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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नोट बंदी से जरी जरदोजी कारोबार ठहर सा गया है। एक तो पहले से ही कच्चा माल महंगा हो गया था ऊपर से नोटबंदी के चक्कर में डिमांड घटने से कारीगरों की मजदूरी तक कम हो गई। कारीगरों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है।  तैयार माल फिलहाल कोई भी खरीदने को तैयार नहीं है। बड़े व्यापारियों ने डंप पुराने माल को खपाने के उद्देश्य से कीमतें गिरा दी हैं।  
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1000 और 500 नोट प्रचलन से बाहर होने पर जरी कारोबार में मंदी छा गई है। व्यापारी कारीगरों को वैलिड करेंसी नहीं दे रहे हैं, उधर कच्चे माल पर दाम बढ़ा दिए गए हैं। ऐसे में यहां के करीब दो लाख से ज्यादा कारीगर खाली हाथ हो गए हैं। 
पुराने शहर निवासी कारीगर सलीम, तसलीम, सोनी, गुड्डू खां, राजू आदि बताते हैं कि महंगा माल मिलने से लागत बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर तैयार काम पर खर्च हो रही पूरी रकम नहीं मिल पा रही है। दिहाड़ी पर काम करने वाले कारीगरों को व्यापारी 500 के पुराने नोट दे रहे हैं, जो कि अब बदले नहीं जा रहे हैं। कहते हैं कि अपने बैंक खातों में जमा कर देना।  कारीगरों का कहना है तमाम लोगोें का बैंक में खाता नहीं है। जिनका बैंक में खाता है, वे पहले लंबी लाइन में लगकर इन रुपयों को जमा करें। उसके दो दिन बाद पूरे दिन लाइन में लगकर इस धनराशि को निकालें। यानी कि चार दिन के काम के बाद साथ दो दिन की बेगार करनी पड़ेगी, तब जाकर मेहनताना निकलेगा।
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15 दिन में इतनी हुई महंगाई (रुपये में)
नाम माल     पहले      अब
सौ मीटर
चेन गिट्टा     725    1000
जरकिन       70        90
धागा डिब्बा   50        70
कटदाना      50         70
नक्शी       500       800
ग्लो डिब्बा   250      360
रेशम डिब्बा  150      180
मोती         70         90

नोट बंदी से हमारा धंधा चौपट हो गया है। कच्चा माल पर दुकानदारों ने मनमाने ढंग से दाम बढ़ा दिए हैं, इससे लागत बढ़ गई है लेकिन इसके अनुपात में कीमत नहीं मिल रही है।
- साबिर खां

कीमत पूरी नहीं मिलने से घरेलू खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। व्यापारी मनमानी कर रहे हैं, सरकार और प्रशासन दुकानदारों पर लगाम कसे।
- आरफा बी

व्यापारी जबरन बड़े नोट दे रहे हैं, माल की आधी अधूरी कीमत मिलने के बाद पुरानी करेंसी बदलने के लिए पूरा परिवार बैंक में लाइन लगता है। इससे दिहाड़ी प्रभावित हो रही है।
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- बाबू खां

जरी कारीगर पहले से ही महंगाई और काम कम होने से परेशान था, अब कच्चा माल पर मनमाने दाम बढ़ा दिए हैं। इससे कामकाज चौपट हो गया है।
- मतलूब
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