बरेली। नगर क्षेत्र के तमाम परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प के मानक पूरे नहीं हैं। कहीं बारिश का पानी भर जाता है तो कई जगह झाड़ियां उगी हुई हैं। किसी में मल्टीपल हैंडवॉश यूनिट नहीं है तो कहीं दिव्यांग छात्रों के लिए शौचालय का अभाव है। इन स्कूलों की तरफ विभाग का ध्यान नहीं है, लेकिन पीएमश्री योजना का लाभ देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने पहले से बेहतर स्थिति वाले स्कूलों का चयन कर लिया गया है।
नगर क्षेत्र के इन स्कूलों में भर जाता है पानी
प्राथमिक विद्यालय सिठौरा, प्राथमिक विद्यालय हजियापुर, प्राथमिक विद्यालय चीनीमिल नेकपुर, प्राथमिक विद्यालय बांसमंडी, प्राथमिक विद्यालय सनैया धनसिंह सहित कई स्कूल हैं, जिनमें हल्की बारिश में भी जलभराव हो जाता है।
इन स्कूलों में संसाधनों का अभाव
प्राथमिक विद्यालय कांकर टोला, खुर्रम गौंटिया, ब्रह्मपुरा, लोधी राजपूत, जखीरा, गढि़या, गंगापुर समेत जिले के कई स्कूल काफी समय से संसाधनों के अभाव से जूझ रहे हैं।
पीएमश्री के तहत चयनित स्कूलों में होगा सुधार
पीएमश्री के तहत पहले 32 स्कूलों का चयन किया गया था। इन स्कूलों में कायाकल्प के ज्यादातर मानक पूरे हैं। प्राथमिक विद्यालय जोगीठेर, उच्च प्राथमिक विद्यालय आलमपुर, बांकुली, बारादरी, दलेलनगर, नरही, डंडिया, नवाजिश अली, सैदपुर, सवरखेड़ा भैरपुरा, रहपुरा गनीमत, यूपीएस गर्ल्स फरीदपुर, किर्शुरा, खानपुर, मधौली, धीरपुर, चुरई दलपतपुर, यूपीएस गर्ल्स सिंधौली, धौरेरा, पंढरी, मुतलकपुर, तिगरा खानपुर, बल्ली, मदनापुर समेत जीआईसी आदि स्कूलों की बेहतर स्थिति है। स्कूलों में टायलीकरण, पानी की व्यवस्था, फर्नीचर आदि की बुनियादी सुविधाएं हैं।
यी है पीएमश्री योजना
पीएमश्री योजना के तहत जिले के पुराने स्कूलों को उच्चीकृत किया जाना था। इसके लिए प्रति स्कूलों दो करोड़ रुपये का बजट सरकार की ओर से दिया जाना है। बजट की सहायता से स्कूलों को मॉडल स्कूल की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
इन मानकों पर विकसित होने हैं स्कूल
पीएमश्री के तहत चयनित स्कूलों में स्मार्ट क्लास, विज्ञान प्रयोगशाला, गणित प्रयोगशाला, डिजिटल लाइब्रेरी, पोषण वाटिका, खेलकूद की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाना था।
वर्जन
पीएमश्री योजना के तहत ऐसे ही स्कूलों का चयन किया जाना था, जो पहले से सही अवस्था में हैं। योजना के तहत इन स्कूलों को मॉडल स्कूलों की तर्ज पर विकसित किया जाना था। इसके अलावा नगर क्षेत्र के ऐसे स्कूल, जिनमें कायाकल्प के मानक अधूरे हैं, उनके लिए विभाग की ओर से प्रयास किया जा रहा है। - संजय सिंह, बीएसए