बरेली। आईसीएमआर की गाइड लाइन के मुताबिक कोरोना संक्रमण की चेन की तलाश करना इस महामारी को रोकने की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा था लेकिन बरेली में स्वास्थ्य विभाग इस मामले में पूरी तरह नाकाम रहा। इस नाकामी के क्या मायने हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दूसरे शहरों से घर लौटे प्रवासियों को छोड़कर बाकी एक भी कोरोना संक्रमित की चेन नहीं तलाशी जा सकी। सिर्फ एक रामपुर बाग के जिस रेडियोलॉजिस्ट को बदायूं की महिला के जरिये संक्रमित होने का दावा किया गया, उसे स्थापित करने के लिए भी पर्याप्त प्रमाण नहीं जुटाए गए। शहर के डॉक्टर बरेली के इन हालात को काफी चिंताजनक मान रहे हैं।
कोरोना के सामुदायिक संक्रमण की जिले में शुरुआत हो गई है या नहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस बारे में कोई सीधा जवाब देने को तैयार नहीं है। हालांकि विरोधाभास यह है कि अफसर एक तरफ आठ से ज्यादा मरीजों में संक्रमण की चेन न मिलने के बाद भी इसे सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत के तौर पर कबूल नहीं कर रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि जब पांच दिन तक किसी संक्रमित की चेन का पता न चले तो उसे सामुदायिक संक्रमण का संकेत माना जा सकता है। इसके साथ यह और भी खतरनाक स्थिति है कि शहर के जिन आठ कोरोना संक्रमितों का सोर्स लापता है, उन सभी में यह एक बात समान है कि उनका निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज होने या आने-जाने की पुष्टि हुई है। लिहाजा संक्रमण के सोर्स की जांच निजी अस्पतालों की तरफ बढ़ते-बढ़ते रास्ते में खत्म हो गई। हालांकि सर्विलांस टीम इस बारे में पड़ताल जारी होने का दावा कर रही है।
अफसरों का फिर हवाई दावा
एक-दो दिन में पता लगा लेंगे बड़ा बाजार
की गर्भवती में संक्रमण के सोर्स का पता
शुक्रवार को आईवीआरआई से जारी रिपोर्ट में बड़ा बाजार की एक गर्भवती में संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद सर्विलांस टीम देर रात तक यह पता लगाने के लिए पूछताछ करती रही कि उसे संक्रमण कहां से और कैसे हुआ लेकिन कोई अहम जानकारी नहीं मिली। हालांकि अफसर पिछले कई केसों की तरह एक-दो दिन में उसके सोर्स तक भी पहुंचने की बात कह रहे हैं। अफसरों का यह दावा कितना हवाई है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो महीनों में हजियापुर के युवक, ब्रह्पुरा के मां-बेटे, साहूकारा के बुजुर्ग, रामवाटिका के ठेकेदार, बांस मंडी की प्रसूता, पीलीभीत बाईपास के निजी अस्पताल की एक नर्स समेत सात लोगों में संक्रमण का सोर्स अब तक लापता है।
संक्रमण की चेन न मिलना बड़े खतरे का इशारा
उम्मीद से ज्यादा खराब हो सकते हैं हालात
संक्रामक रोग चैप्टर के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि गांवों में हजारों की तादाद में प्रवासी आए हैं। शहर में इनकी संख्या काफी कम है। इसके अलावा जो शहर आ रहे हैं उनकी ट्रेसिंग भी हो रही है और जांच में कोई भी शक होने पर उन्हें आइसोलेट किया जा रहा है मगर फिर भी यहां संक्रमण की चेन न मिलना बड़े खतरे का संकेत है। दूसरी ओर गांवों में जहां ज्यादातर की सैंपलिंग तक नहीं हो सकी है, वहां संक्रमितों की तादाद अच्छी-खासी हो सकती है। इससे सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है कि गांव किस कदर खतरे में हैं। आशंका तो यह तक है कि अगर पर्याप्त टेस्ट हों तो शहर में ही सैकड़ों ऐसे संक्रमित मिल सकते हैं जिनमें संक्रमण की चेन का पता नहीं लगाया जा सकता।
किसी भी संदिग्ध में संक्रमण की पुष्टि होने के साथ सर्विलांस टीम उसका सोर्स तलाशने में लग जाती है। कुछ मरीजों में संक्रमण कहां से आया, इसकी पड़ताल की जा रही है। पूछताछ में कोई दिक्कत होने पर पुलिस का सहयोग लेने को भी कहा गया है। - डॉ. रंजन गौतम, एसीएमओ, जिला सर्विलांस अधिकारी