बरेली। मिर्गी कोई जादू-टोना या ऊपरी हवा का चक्कर नहीं, यह मस्तिष्क की बीमारी है। अगर समय पर इलाज शुरू हो जाए और मरीज दवा का नियमित सेवन करें तो इससे राहत मिलती है। अनदेखी से जान का जोखिम हो सकता है।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक ओपीडी में प्रतिमाह 80 से सौ मरीज परामर्श के लिए पहुंचते हैं, जो नियमित इलाज से ठीक भी हो रहे हैं। मिर्गी दो प्रकार की होती है। आंशिक मिर्गी में दिमाग के एक भाग का और व्यापक मिर्गी में पूरे दिमाग में दौरा पड़ता है। सुझाव दिया कि बगैर डॉक्टर को दिखाए दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन हैमरेज से भी मिर्गी होने का खतरा रहता है।
होती है ईईजी, एमआरआई, सीटी स्कैन जांच
ईईजी, एमआरआई, सीटी स्कैन जांच से रोग का पता चलता है। मिर्गी की वजह मस्तिष्क तंत्रिकाओं का असंतुलन है। न्यूरॉन में इलेक्ट्रिसिटी पैदा होती है। इलेक्ट्रिसिटी का प्रभाव बाहर न निकले, इसलिए न्यूरॉन के चारों ओर माइलिन शीट होती है। मिर्गी रोग में कुछ न्यूरॉन की माइलिन शीट टूट जाती है, जिससे करंट बाहर आकर अन्य न्यूरॉन को झटके देता है।
कराएं पूरा इलाज
मनोचिकित्सक के मुताबिक मिर्गी का दौरा मस्तिष्क विकार है। अंधविश्वास में लोग इसे ऊपरी हवा समझ लेते हैं, जो कि गलत है। मिर्गी की दवा सरकारी अस्पताल में निशुल्क हैं। इसका इलाज लगातार चलता रहता है। अगर एक दिन का अंतराल होता है तो दौरा पड़ने का खतरा रहता है। नियमित जांच भी कराते रहना चाहिए।