प्रदेश के मुख्य सचिव ने जारी किए निर्देश, सख्ती से पालन कराने को कहा
बरेली। तीसरे चरण का लॉकडाउन शुरू होने के साथ सरकार के फैसले के तहत दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों का लौटना तो शुरू हो गया है। शासन ने इस बीच निर्देश दिया है कि इन प्रवासियों में भले ही कोरोना के लक्षण न हों लेकिन फिर भी उन्हें बतौर एहतियात 21 दिन के लिए होम क्वारंटीन किया जाएगा। इस दौरान इलाके की आशा वर्कर उनकी निगरानी की जिम्मेदारी उठाएंगी।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार प्रवासियों के आने पर जिला प्रशासन उनकी स्क्रीनिंग करा रहा है। इस दौरान प्रत्येक प्रवासी का मूल निवास, मोबाइल नंबर समेत लाइन लिस्टिंग रिकॉर्ड लिया जा रहा है। संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर उन्हें फैसिलिटी क्वारंटीन सेंटर में रखा जाएगा। जांच के बाद अगर संक्रमित मिले तो आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करया जाएगा। जिनमें लक्षण होंगे लेकिन वह संक्रमित नहीं होंगे, उन्हें फैसिलिटी क्वारंटीन में रखकर दोबारा उनकी जांच की जाएगी। सात दिन बाद भी वह संक्रमित नहीं मिलेंगे तो 14 दिन और होम क्वारंटीन किया जाएगा। बिना लक्षण वाले लोगों को 21 दिन होम क्वारंटीन में रखा जाएगा। जिनके घर में होम क्वारंटीन की व्यवस्था नहीं होगी, उन्हें सरकारी व्यवस्था के तहत क्वारंटीन कराया जाएगा। होम क्वारंटीन में रहने वालों की मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
होम क्वारंटीन होने वालों के लिए निर्देश
21 दिन के होम क्वारंटीन के दौरान प्रवासी को घर के अलग कमरे में रहना होगा। मास्क, गमछे या दुपट्टे से मुंह को लगातार ढके रहने के साथ हाथों को साबुन से धोते रहना होगा। उनके घर में किसी और को आने अनुमति नहीं होगी। परिवार का एक ही सदस्य जरूरी सामान खरीदने के लिए घर से बाहर निकल पाएगा। लौटने पर हाथों को साबुन से धोने के बाद ही उसे घर में घुसने दिया जाएगा। निगरानी समिति लगातार निगरानी करेगी। यह भी सुनिश्चित करेगी कि परिवार के सभी सदस्यों को सरकारी सुविधा और राहत योजनाओं का लाभ मिलता रहे। परिवार किसी सामाजिक विरोध या कठिनाई होने पर निगरानी समिति से शिकायत करेंगे। होम क्वारंटीन शख्स में कोरोना के लक्षण शुरू होते ही उसे इसकी सूचना आशा वर्कर को अनिवार्य तौर पर देनी होगी।
निगरानी समिति की जिम्मेदारी
60 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग, गर्भवती महिला, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज से ग्रसित लोग क्वारंटीन व्यक्ति के पास न जाएं।
घर के बाहर क्वारंटीन फ्लायर पर शुरुआत और आखिरी तारीख लिखना जरूरी ताकि क्वारंटीन होने की जानकारी और लोगों को मिले।
21 दिनों की क्वारंटीन अवधि पूरी होने पर आशा वर्कर स्थिति की जानकारी बीसीपीएम को देंगी और फ्लायर को हटाएंगी।
आशा वर्कर क्वारंटीन घरों में पहुंचकर परिवार में किसी को खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ जैसी जानकारी लेंगी।
लक्षण दिखाई देने पर सूचना प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को देनी होगी। तीन दिन के लिए बुखार की दवा की खुराक दी जाएगी।
सांस लेने में तकलीफ होने पर संबंधित व्यक्ति को 108 एम्बुलेंस से पास के क्वारंटीन फैसिलिटी में भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
‘अगर लक्षण हैं और कोरोना टेस्ट निगेटिव है तो इसका मतलब कोरोना नहीं है। ऐसी स्थिति में भी एहतियातन खुद को औरों से बचाकर रखे। घर में होम क्वारंटीन रहना बेहतर रहेगा। जिस प्रवासी में भले ही लक्षण नहीं है और टेस्ट भी निगेटिव है फिर भी उसे सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए। मास्क पहनें और कहीं बाहर जाएं तो जाते समय और वापस आकर साबुन से हाथ अच्छे से धोएं। - डॉ. विनोद पागरानी, उपाध्यक्ष, आईएमए