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इस बार होली में हाथ मिलाकर नहीं..नमस्कार करें अभिवादन

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बरेली। कोरोना के खौफ से इस बार होली मिलन समारोह भी प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल समूह में इकट्ठे लोगों में कोरोना का संक्रमण फैलने की काफी ज्यादा संभावना होती है, इसी कारण डॉक्टरों की सलाह है कि हाथ मिलाने या गले मिलने से बचा जाए। शासन की ओर से भी लगभग ऐसी ही गाइड लाइन जारी हुई है। ये हिदायतें साफ बता रही हैं कि होली पर इस बार दूर से नमस्कार करना ही बेहतर रहेगा।
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होली पर गले मिलकर बधाई देने की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा शायद इस बार कोरोना के कहर से टूट जाए। डॉ. निहारिका के मुताबिक कोरोना वायरस से बचाव की पूरी दुनिया में अब तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है। जागरूकता और सावधानी ही फिलहाल इस महामारी से बचने का सबसे बेहतर तरीका है। जागरूकता के ही लिहाज से होली पर गले मिलने की परंपरा में बदलाव जरूरी है क्योंकि कोरोना वायरस का संक्रमण प्रभावित मरीजों के नजदीकी संपर्क में आने के साथ छूने मात्र से भी हो सकता है। इसी को देखते हुए डॉक्टर हाथ मिलाने और गले मिलने से परहेज करने की सलाह दे रहे हैं। बरेली में ही करीब 54 लोग ऐसे हैं जिन्होंने हाल ही में चीन और थाईलैंड की यात्रा की है। इनमें से सात लोगाें की जांच सरकार करा चुकी है। दस लोग अब भी स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में हैं।
प्रधानमंत्री का ट्वीट हो रहा वायरल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोरोना का जिक्र करते हुए इस बार किसी भी होली मिलन समारोह में शामिल न होने का ट्वीट भी इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। मोदी ने बुधवार सुबह करीब बजे ट्वीट किया- ‘दुनिया भर के विशेषज्ञों ने कोविड-19 कोरोना वायरस के प्रसार से बचने के लिए सामूहिक समारोहों को कम करने की सलाह दी है, इसलिए, इस साल मैंने किसी भी होली मिलन कार्यक्रम में भाग न लेने का फैसला किया है।’
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कोरोना: ये हैं प्रारंभिक लक्षण
बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत। कोरोना के लक्षण सामान्य सर्दी जुकाम जैसे ही होते हैं इसलिए टेस्ट करना जरूरी होता है ताकि पुष्टि हो सके कि संक्रमण कोरोना वायरस यानी कोविड-19 का ही है या सामान्य कोल्ड इन्फेक्शन।
ऐसे रह सकते हैं सुरक्षित
लगातार हाथ धोते रहें। गले मिलने और हाथ मिलाने से बचें। भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूरी बनाकर रखें। मास्क का इस्तेमाल करें। छींकते या खांसते समय चेहरे को ढककर रखें।
कोरोना से बचने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं
आयुर्वेद के विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार कहते हैं कि कोई भी संक्रमण शरीर पर तभी हावी होता है जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के तमाम कारगर नुस्खे हैं। यदि रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी तो वायरस के हमला करने पर भी इलाज के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गिलोय का अंगूठे बराबर मोटे एक इंच लंबे चार टुकडे़, 5-6 काली मिर्च, 10-12 तुलसी के पत्ते और अदरक का छोटा टुकड़ा एक लीटर पानी में उबालें। 250 मिली शेष रहने पर छानकर 50 मिली को दिन में 4-5 बार पीएं। इसके अलावा एक ग्राम त्रिकटु चूर्ण और 250 मिग्रा गिलोय सत्व को शहद के साथ सुबह-शाम लें। तिल के तेल की 1-2 बूंद रोज सुबह नाक में डालें।
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