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Bareilly News: संसाधन न साथी... दम तोड़ रही हॉकी

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बरेली। भारतीय पुरुष हॉकी एशियाई चैंपियन बन गई, पर शहर में इसकी चमक फीकी है। सुविधाओं और संसाधनों के अभाव की वजह से बीते 20 साल से जिले का कोई भी खिलाड़ी भारतीय जूनियर टीम तक अपनी जगह नहीं बना पाया है। जिला हॉकी संघ सचिव वसीम खान के मुताबिक, बीते सात वर्षों में कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान नहीं बना पाया है। शहर को हॉकी प्रतियोगिताओं की मेजबानी के अवसर भी नहीं मिले हैं।
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शहर में हॉकी का बुनियादी ढांचा कागज पर मौजूद जरूर है, लेकिन हकीकत में यह खिलाड़ियों की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहा। भारतीय खेल प्राधिकरण का एस्ट्रोटर्फ क्षतिग्रस्त होने से खिलाड़ियों को अभ्यास का अवसर नहीं मिल पा रहा है। वहीं, स्पोर्ट्स स्टेडियम का साधारण मैदान तकनीकी दृष्टि से पुराना है। कोच हैं, लेकिन वे सीमित संसाधनों में काम कर रहे हैं। क्रिकेट, बैडमिंटन और फुटबॉल जैसे खेलों में निजी अकादमियां लगातार खिलाड़ियों को निखार रही हैं, पर हॉकी पूरी तरह सरकारी ढांचे पर निर्भर है। संवाद

खिलाड़ियों को करना होगा प्रेरित
खिलाड़ियों को इस खेल के प्रति प्रेरित करना होगा। इसके बाद उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देकर आगे बढ़ाया जा सकता है। अभिभावकों को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। - वसीम खान, सचिव, जिला हॉकी संघ
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क्षतिग्रस्त एस्ट्रोटर्फ की मरम्मत हो जाए तो खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए उपयुक्त स्थान मिल जाएगा। स्कूलों में खेलों को बढ़ावा दिया जाए तो प्रतिभाएं सामने आएंगी। - गीता शर्मा, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
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