बरेली। कोविड की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। संक्रमित बच्चों को ऑक्सीजन बेड मुहैया कराने के लिए पीडियाट्रिक इन्सेंटिव केयर यूनिट (पीकू) वार्ड भी बनकर तैयार हो चुके हैं। मगर यहां बच्चों से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए बाल रोग विशेषज्ञ ही तैनात नहीं हैं। लिहाजा, बच्चों को बेड तो मिलेगा पर उन्हें बेहतर इलाज नहीं मिल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रत्येक सीएचसी पर एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती जरूरी है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में सीएचसी और यूपीएचसी मिलाकर करीब 36 स्वास्थ्य केंद्र हैं। सभी पर बाल रोग विशेषज्ञ अथवा गायनोकोलॉजिस्ट की तैनाती जरूरी है ताकि इलाज के लिए पहुंचने वाले बच्चों और महिलाओं का बेहतर इलाज हो सके, लेकिन जिले के सरकारी अस्पतालों में सिर्फ चार बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जिला अस्पताल में चार की जगह दो बाल रोग विशेषज्ञ ही सेवाएं दे रहे हैं। 15 सीएचसी में से महज दो पर ही बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। यूपीएचसी पर महिला रोग विशेषज्ञ हैं, पर इनकी भी तादाद महज सात ही है।
शासन से लगातार बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की मांग सीएमओ की ओर से की जा रही है पर अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। पिछले दिनों पीकू वार्ड में तैनाती के लिए जिला प्रशासन ने आईएमए से सहयोग मांगा था। आईएमए से ऑनकॉल जिले के निजी अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञों को सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देने के लिए कहा था। इस पर आईएमए ने सहमति भी जताई थी।
आंकड़ों में कोविड से जंग की तैयारी
संभावित तीसरी लहर को देखते हुए कोविड चिकित्सालय, तीनों मेडिकल कॉलेज समेत 16 निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल की मंजूरी दी गई है। इनमें 1185 ऑक्सीजन बेड, 465 आईसीयू बेड और 111 वेंटिलेटर बेड समेत 1732 बेड की व्यवस्था है। ऑक्सीजन की व्यवस्था के लिए तीन सौ बेड अस्पताल, महिला अस्पताल, सीएचसी बहेड़ी, मीरगंज, आंवला, भमोरा में प्लांट स्थापित हो गए हैं। जिला अस्पताल में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने को मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा 50 बेड से अधिक की क्षमता वाले सभी निजी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने के लिए शासनादेश जारी हो चुका है।
बच्चों के इलाज के लिए कहां, कितने बेड
जिले में बच्चों के संक्रमित होने पर उन्हें भर्ती करने के लिए पीकू वार्ड बनाए गए हैं। इनमें 140 डेडीकेटेड पीडियाट्रिक बेड, सात पीआईसीयू/एचडीयू बेड और 136 एलपीएम बेड सरकारी और निजी चिकित्सालयों में मौजूद हैं। तीन सौ बेड कोविड चिकित्सालय में 80, सीएचसी शीशगढ़ में 30, सीएचसी आंवला में 30, मीरगंज सीएचसी में 30 और बहेड़ी सीएचसी में 50 बेड के पीकू वार्ड बन चुके हैं। साथ ही, राजश्री, एसआरएमएस, रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में 50-50 बेड के पीकू और आइसोलेशन वार्ड की स्थापना की जा चुकी है। सभी निजी मेडिकल कॉलेजों में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती भी है।
क्या कहते हैं सीएचसी के चिकित्साधिकारी
सीएचसी नवाबगंज अधीक्षक डॉ. अजमेर सिंह के मुताबिक, संभावित तीसरी लहर से जंग की सभी तैयारियां हो चुकी हैं। आठ बेड का वार्ड भी तैयार है पर सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ की कमी है। अगर शासन चिकित्सक उपलब्ध करा दे तो उपचार और बेहतर तरीके से हो सकेगा। वहीं, क्योलडिया सीएचसी पर चिकित्सा प्रभारी के मुताबिक दस बेड का कोरोना वार्ड बनाया गया है। इसमें सात ऑक्सीजन सिलिंडर समेत ऑक्सीजन कन्संट्रेटर मौजूद हैं पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। उच्चाधिकारियों को बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए कहा जा रहा है।