फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आम छात्र नहीं नेता चाहते हैं छात्र संघ चुनाव

Tue, 20 Sep 2016 01:23 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
विज्ञापन
छात्रसंघ्‍ा
विज्ञापन
 छात्र नेता भले ही छात्र संघ चुनाव कराने की मांग पुरजोर ढंग से उठा रहे हैं लेकिन आम छात्रों में कैंपस को चुनावी अखाड़ा बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। छात्र पढ़ाई को लेकर तो चिंतित हैं ही उन्हें रोज रोज के हंगामों के कारण भी छात्र राजनीति ठीक नहीं लगता। 
विज्ञापन

बरेली कालेज में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा कंचन कहती हैं कि वैसे ही कालेजों में पढ़ाई नहीं होती। छुट्टियां ही बहुत हो जाती हैं। छात्र संघ चुनाव होने से  हंगामा होगा। रुहेलखंड विश्वविद्यालय से पीजीडीसीए छात्र रोहित कहते हैं कि छात्र प्रतिनिधि आम छात्रों के कोई काम नहीं आते वरना विश्वविद्यालय और बरेली कालेज में पढ़ाई पटरी से नहीं उतरती। आम छात्रों की समस्याओं के निराकरण में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं रहती। एलएलबी कर रहीं प्रियंका कहती हैं कि छात्र संघ चुनाव जीतकर वह कालेज प्रशासन और विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर अपना दबाव बनाए रखना चाहते हैं ताकि अपने मनमाने काम करा सकें।
 इतनी बार चुनाव हुए लेकिन परीक्षा और रिजल्ट में देरी और आरडी कटवाने के नाम पर छात्र-छात्राओं से वसूली जैसी समस्याओं का निस्तारण आज तक नहीं हो सका है। छात्र प्रतिनिधि बनकर छात्र नेताओं ने खुद टॉपर बनने में खास दिलचस्पी ली है। इसके कई उदाहरण हैं। परीक्षाओं में खुलेआम नकल को लेकर भी छात्र नेताओं की भूमिका सामने आई है। बाहर से कापियां लिखकर परीक्षा कक्ष में लाए जाने में भी छात्र नेताओं का नाम उछला। कई छात्र प्रतिनिधि कैंपस के बाहर भी गुंडागर्दी के लिए चर्चा में आए।
विज्ञापन



वोट ही 40 फीसदी पड़े
बरेली कालेज में सात नवंबर 2012 को हुए छात्र संघ चुनाव में लगभग 40 फीसदी छात्र-छात्राओं ने ही मतदान किया था। लगभग सात हजार वोटरों में से लगभग 31 सौ ने वोट डाले थे। इससे तस्वीर साफ हो जाती है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में 3500 वोटरों मेें से लगभग 2600 ने मतदान किया था।

इसलिए नहीं कराना चाहते चुनाव
बरेली कालेज और रुहेलखंड विश्वविद्यालय में चार साल से चुनाव नहीं हो पाए हैं।  अब चूंकि विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत शासन ने चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं इसलिए छात्र संगठनों के नेताओं को इसकी मांग उठाने का मौका मिल गया है लेकिन कालेज प्रशासन और विश्वविद्यालय के अधिकारी अराजकता और गुंडागर्दी के डर से चुनाव नहीं कराना चाहते हैं इसीलिए टालमटोल कर रहे हैं। जिला प्रशासन भी चुनाव कराने के लिए कैंपसों को हरी झंडी नहीं दे रहा है।

जो अध्यक्ष बनें, विवादों में रहे
 बरेली कालेज और रुहेलखंड विश्वविद्यालय में अब तक हुए छात्र संघ चुनाव में जितने भी छात्र नेता अध्यक्ष बनें, अधिकांश विवादों में रहे।  कैंपस से निकलने के बाद राजनीति में भी कैरियर नहीं बना पाए। इनमें भूपेंद्र कुर्मी, अनुराग सिंह नीटू, जितेंद्र यादव टीटू और प्रशांत पटेल के नाम प्रमुख हैं। निवर्तमान अध्यक्ष जवाहरलाल पर तो रंगदारी मांगने के भी आरोप लगे।  पूर्व अध्यक्ष चंद्रभान सुमन और सुनील यादव भी कई बार विवादों में रहे हैं।


छात्र नेताओं की बात
छात्र संघ चुनाव छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। इसके जरिए छात्र अपनी समस्याओं का निस्तारण करा पाते हैं 
-गजेंद्र पटेल, विश्वविद्यालय

अब तो शासन ने भी चुनाव कराने को कह दिया है इसलिए किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
-रोहित यादव, बरेली कालेज
 
कोट...
हमें चुनाव कराने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन डरते हैं बवाल और अराजकता से, इसीलिए जिला प्रशासन से सहयोग मांगा है। प्रशासन से सहयोग मिलते ही चुनाव का कार्यक्रम बना लेंगे।
विज्ञापन

-प्रो. वीपी सिंह, प्रतिकुलपति, रुहेलखंड विवि
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें