बरेली। लॉकडान में बंद हुए स्कूल अब तक नहीं खुले हैं। ऐसे में स्कूली वाहन भी बंद हैं। शासन ने अब फीस जमा करने के आदेश दे दिए हैं, लेकिन उसमें ट्रांसपोर्ट की फीस नहीं जोड़ी गई है। इस पर स्कूली वाहनों के मालिक और चालकों ने सरकार से भरण पोषण भत्ता देने की मांग की है। अभिभावकों से भी अपील की है कि आर्थिक संकट की इस घड़ी में उनकी मदद करें।
इंडिपेंडेंट स्कूल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भरण पोषण के लिए 75 फीसदी शुल्क देने की मांग उठाई है। प्रेसवार्ता में अध्यक्ष निशांत पवार ने कहा कि फीस न मिलने के कारण स्कूली वाहनों के मालिक और चालक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। वाहन चल नहीं रहे हैं, लेकिन उन्हें रोड टैक्स, परमिट फीस, इंश्योरेंस, फिटनेस का शुल्क देना पड़ रहा है। कई लोगों को बैंक की किस्त देना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे फ्यूल और मेंटिनेंस के हिसाब से 25 फीसदी फीस न दे, लेकिन 75 फीसदी शुल्क तो दें। दिलीप गुप्ता ने कहा कि गाड़ियों का छह महीने का टैक्स माफ किया जाए। वाहनों के बीमा, परमिट और फिटनेस की अवधि छह महीने बढ़ाई जाए। इस मौके पर एचके सिंह, भानु पटेल, अभिषेक मिश्र, ज्ञानप्रकाश आदि मौजूद रहे।