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परिवार नियोजन में नहीं विश्वास.. दो नहीं यहां चार बच्चों की आस

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Population Growth rate in India - फोटो : demo photo
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परिवार नियोजन में नहीं विश्वास.. दो नहीं यहां चार बच्चों की आस
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बरेली उच्च प्रजनन दर वाले जिलों में शामिल, शासन ने दिए व्यापक प्रयास के निर्देश
जिले में ज्यादातर दंपतियों के चार बच्चे, 3.6 फीसदी थी पिछले साल बरेली में प्रजनन दर

बरेली। जनसंख्या नियंत्रण के लिए साल-दर-साल करोड़ों फूंके जाने के बावजूद बरेली में आबादी बढ़ने की रफ्तार कम होने के बजाय और तेज होती जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 0.6 फीसदी की वृद्धि के साथ बरेली अब उच्च प्रजनन दर वाले जिलों में शामिल हो गया है। प्रजनन दर 4.2 फीसदी पर पहुंचने के बाद शासन ने अब यहां जनसंख्या नियंत्रण के लिए व्यापक प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।
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पिछले साल प्रदेश सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में बरेली 3.6 फीसदी के साथ उच्च प्रजनन दर वाले जिलों की सूची में शामिल रहा था। शासन ने आंकड़ों को गंभीरता से लेते हुए लोगों को जागरूक कर प्रजनन दर नियंत्रित करने के निर्देश दिए थे। मगर, इस साल गणना हुई तो आंकड़े और ज्यादा चौंकाने वाले मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रजनन दर इस साल और बढ़कर 4.2 फीसदी पर पहुंच चुकी है। इसका सीधा अर्थ है कि हम दो-हमारे दो के सूत्र का लोगों पर कोई असर नहीं हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक जिले में ज्यादातर दंपती तीन से चार बच्चे पैदा कर रहे हैं। उच्च प्रजनन दर के आंकड़ों को देखते हुए अबकी बार शासन की ओर से जारी रिपोर्ट में बरेली को उच्च प्रजनन दर के औसत को कम करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण के लिए उच्च प्राथमिकता वाले जिलों की सूची में दर्ज कर लिया गया है।

35.5 फीसदी महिलाएं परिवार नियोजन के दायरे में नहीं

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार बरेली में गर्भनिरोधक दर यानी सीपीआर के तहत 20-49 वर्ष की विवाहित महिलाओं में पारंपरिक या आधुनिक गर्भ निरोधक साधनों के प्रयोग का प्रतिशत 65.7 प्रतिशत है। करीब 34.3 फीसदी महिलाएं परिवार नियोजन के किसी भी साधन का प्रयोग नहीं कर रहीं हैं। विवाहित महिलाओं में आवश्यकता होने के बावजूद किसी भी गर्भनिरोधक साधन का प्रयोग न करने का प्रतिशत 6.7 है। इसके अलावा महिला और पुरुष नसबंदी में भी बरेली जनपद मंडल में चौथे पायदान पर है।

खतरा: बढ़ सकती है मातृ-शिशु मृत्युदर

गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. भारती सरन का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणाम बताने के लिए हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। कम समय में बार-बार गर्भधारण करना महिला के स्वास्थ्य पर खराब असर डालता है। मातृ और शिशु मृत्युदर बढ़ने की यह प्रमुख वजह भी है, क्योंकि औसतन एक से दूसरे बच्चे के बीच करीब चार से पांच साल का अंतराल होना जरूरी है। ऐसा न होने पर मां का शरीर कमजोर होने लगता है। वहीं, कमजोर शरीर से स्वस्थ बच्चे के पैदा होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

नई थीम के साथ मनाया जा रहा पखवाड़ा

परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. रंजन गौतम के मुताबिक इस बार आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी, सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी थीम पर अभियान चलाया जा रहा है। दंपती संपर्क पखवाड़ा के तहत 10 जुलाई तक प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क किया जाएगा। दूसरे चरण में सेवा प्रदायगी जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की शुरूआत 11 जुलाई से होगी जो 31 जुलाई तक चलेगा। कंटेन्मेंट और बफर जोन में भी कोविड प्रोटोकॉल के तहत परिवार नियोजन के संदेशों को ग्राम, ब्लॉक तक पहुंचाने के लिए मोबाइल पब्लिसिटी वैन चलाई जाएगी।
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