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कायाकल्प की गूंज लखनऊ तक खंडहर स्कूल जैसे के तैसे ही रहे

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बरेली। पिछले सालों में जिले के बेसिक स्कूलों के कायाकल्प का गुणगान शासन तक जमकर हुआ लेकिन यह कायाकल्प असल में कागजों के खेल से ज्यादा कुछ नहीं था। दरअसल देहात में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों की इमारतों की हालत और ज्यादा बुरी है। इन्हीं में से कुछ स्कूलों की मामूली मरम्मत कराकर उन्हें कायाकल्प योजना के तहत मॉडल स्कूल घोषित कर दिया गया। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों का जायजा लिया तो उन्हें समस्याओं से घिरा पाया।
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नवाबगंज : नाम लिखवाने वाला कोई नहीं, कटवाने वाले सौ के पार
नवाबगंज के बीचोबीच करीब सौ साल पुराने स्कूल के भवन का पुनर्निर्माण करीब चार साल से अटका है। यहां पढ़ रहे बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है लेकिन वह इतनी दूर है कि बच्चों का आना-जाना ही बेहद मुश्किल है। मजबूरी में अभिभावक इस स्कूल से बच्चों के नाम कटवाकर दूसरे स्कूल की तलाश कर रहे हैं। अब तक करीब सौ बच्चों के नाम कट चुके हैं। बीईओ संतोष सिंह के मुताबिक जर्जर भवन गिराने के बाद लोक निर्माण विभाग को निर्माण करना था। उसके अधिकारियों को पत्र भी लिखा गया लेकिन विभाग ने अब तक काम शुरू नहीं किया है।
तिगरा स्कूल : अब तक नहीं लगा गेट, सामने ही पड़ रहा है घूरा
रामनगर ब्लॉक के गांव तिगरा खानपुर में प्राइमरी और जूनियर स्कूल की बाउंड्रीवाल करीब दो साल पहले बना दी गई मगर अब तक गेट नहीं लगा। अक्सर स्कूल में आवारा पशुओं के घुसकर उत्पात मचाने से बच्चे खतरे में पड़ जाते हैं। प्रधानाध्यापक पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि स्कूल के सामने खाली पड़ी जगह में घूरा डाला जा रहा है। इसकी सफाई के लिए वीडीओ से कई बार लिखित शिकायत की गई पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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मीरापुर स्कूल : 26 साल पहले बने थे कमरे, लिंटर अब तक नहीं पड़ा
फतेहगंज पश्चिमी के प्राइमरी स्कूल मीरापुर में 1996 में दो कक्षों का निर्माण कराया गया था जिसे अधूरा छोड़ दिया गया। 26 साल गुजरने के बाद भी यह भवन अधूरा ही पड़ा है। कक्षा कक्षों के निर्माण के बाद उनके ऊपर लिंटर ही नहीं डाला जा सका। स्कूल प्रधानाध्यापक के मुताबिक उन्होंने कई बार विभाग के अधिकरियों को पत्र लिखकर निर्माण कार्य पूरा कराने की फरियाद की मगर कोई नतीजा नहीं निकला। टिटौली मजरा दूगीपुर स्कूल का गेट नहीं लगा है।
गुलड़िया स्कूल : टूटकर गिरता रहता है प्लास्टर, पर नहीं हो रही मरम्मत
प्राइमरी स्कू ल गुलड़िया की इमारत भी बुरी तरह खस्ताहाल हो चुकी है। जहां तहां से टूटकर अचानक प्लास्टर गिरता रहता है। स्टाफ के मुताबिक मरम्मत के लिए विभाग को लगातार पत्र लिखा जा रहा है मगर फिर भी कोई फैसला नहीं लिया गया है। मीरगंज के गांव खमरिया आजमपुर की गौटिया में आजादी के बाद से अब तक स्कूल का निर्माण नहीं हुआ। हाल ही में विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की भी घोषणा ग्रामीणों ने की लेकिन हालात नहीं बदले।
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