बरेली। नकटिया नदी के किनारे की जमीन पर बिल्डरों की नजर लग गई है। नहर पर कालोनियां बना चुके बिल्डर अब नकटिया नदी को कूड़े से पाटने में लग गए हैं। चार कालोनियों से कूड़े का ढेर और सीवर का पानी नदी में पहुंचाया जा रहा है। इससे नदी का पानी प्रदूषित होकर काले रंग का हो गया है। डोहरा से हरूनगला तक नदी गायब होकर नाले में तब्दील हो चुकी है।
बीसलपुर रोड पर ग्रीन पार्क, गोल्डन ग्रीन पार्क और ग्रीन पार्क एक्सटेंशन का प्रतिदिन सैकड़ों टन कूड़ा नदी के किनारे डाला जा रहा है। कालोनियों के पीछे लोहे का गेट सिर्फ कूड़े के ठेले नदी के किनारे ले जाने के लिए खोला जाता है। कूड़ा ठेकेदार मुकेश अपने कर्मचारियों से इन कालोनियों का कूड़ा प्रतिदिन नदी में डलवा रहे हैं। कालोनियों का सीवर भी नदी की ओर खुला है। सीवर का पानी नदी में मिलकर उसे हद दर्जे तक प्रदूषित कर चुका है। सुपरसिटी कालोनी के पीछे एक बिल्डर ने नदी के किनारे तक कूड़े से पाटकर उस पर कालोनी बनाने का काम शुरू कर दिया है। डोहरा से हरूनगला और महानगर कालोनियों के आस-पास नकटिया नदी की जमीन कूड़े के ढेर में तब्दील होकर गायब हो चुकी है। इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बीडीए की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
बला टाल रहे जिम्मेदार
‘यहां नगर निगम कूड़ा नहीं उठवाता। प्राइवेट बिल्डरों को कूड़ा नदी में डालने से रोकने का काम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का है। पीसीबी को इसके लिए कदम उठाने चाहिए।’
ईश शक्ति कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम
‘कूड़ा इकट्ठा होने से नदी में प्रदूषण हो रहा है तो उसे नगर निगम को रोकना चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी कूड़ा उठवाना नहीं है।’ आरके त्यागी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड